अष्टमी और नवमीं में कन्या पूजन का विशेष महत्तव

चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल को समाप्त हो रहे हैं. इसी दिन अष्टमी और नवमीं दोनों मनाई जाएंगी. नवरात्रि के इन दोनों दिन घरों और मंदिरों में कन्या पूजन किया जाता है. अष्टमी और नवमीं वाले दिन कन्याओं को हलवा, पूरी और चने का भोग लगाया जाता है. उन्हें तोहफे और लाल चुनरी उड़ाना भी शुभ माना जाता है. यहां जानिए इस नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और कन्याओं को पूजने का सही तरीका.

1). सबसे पहले मंदिर में भगवान गणेश का नाम लेकर उनकी पूजा करें.
2). अष्टमी और नवमीं की देवी महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा करें.
3). मंदिर में पूजा के बाद कन्या को बुलाएं. इसके लिए उनके घर जाकर उन्हें आमंत्रित करें या फिर सुबह प्यार से हाथ जोड़कर उन्हें घर में प्रवेश कराएं. कन्या अगर 2 से 10 साल के बीच की हों तो और भी बेहतर.
4). घर में कन्याओं के प्रवेश के दौरान जय माता के जयकारे लगएं. 
5). कन्याओं को साफ आसन पर बिठाएं और उनके पैर धोएं.
6). उनके माथे पर रोली या कुमकुम का टीका लगाएं.
7). कन्याओं के हाथों में मौली बांधे. सभी कन्याओं की घी के दीपक दिखाकर आरती उतारें.
8). आरती के बाद कन्याओं को पूरी, हलवा और चने का प्रसाद खिलाएं. कन्याएं को बिना टोके खिलाएं. 
9). भोग के बाद कन्याओं को भेंट और उपहार दें. आखिर में उनके पैर छूकर घर के बाहर तक विदा करें.
10). साथ ही याद रखें कि कन्याओं को सिर्फ अष्टमी या नवमीं वाले दिन ही नहीं बल्कि साल के हर दिन उनका सम्मान करें.

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