आखिर क्यों भारत में लोग Mahindra की कारों को इतना पसंद करते हैं ? आइये जानते हैं

महिंद्रा भारत की सबसे पुरानी कार निर्माता कंपनियों में से एक है. मासिक सेल्स के मामले में हर सेगमेंट में अग्रणी रहने वाली ये कम्पनी आज भी दूसरे कार निर्माताओं को भारतीय कार बाज़ार के परिदृश्य को समझने का पाठ पढ़ा सकती है.

तो चलिए,आज हम आपको बताते हैं वो दस वजहें, जिनके कारण भारत में महिंद्रा की गाड़ियाँ के लिए इतना दिवानापन है :-

  1. रफ-एंड-टफ गाड़ियाँ

बेहतरीन उदाहरण: Mahindra Bolero

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इस बात में कोई दो राय नहीं है कि भारतीय सड़कों कि हालत खस्ता है. ये भी एक तथ्य है कि आज की तारीख में अनेकों राष्ट्रीय और राज्य सड़क राजमार्ग का कायाकल्प हुआ है लेकिन अभी छोटे शहरों और गावों की सड़कों कि हालत बेहद खराब हैं. और इन ही सड़कों पर बोलेरो जैसी गाड़ी की सही क्षमता निखर कर सामने आती है. खरीदने और रख रखाव के लिहाज़ से महिंद्रा बोलेरो एक ऐसी किफायती SUV है जो टूटी-फूटी सड़कों पर बिना उफ्फ किये हुए दौड़ लेती है. भले ही बोलेरो की सवारी आपको अधिक आरामदायक और गुदगुदाने वाली न लगे लेकिन अपनी जीवटता और मजबूती के लिहाज़ से ये कम्पनी कि ओर से पेश किया गया एक बेहतरीन उत्पाद है. और शायद यही कारण है कि पिछले 18 वर्षों से यह कार बेधड़क बिक रही है और बिकती ही जा रही है.

2. विश्वसनीयता

बेहतरीन उदाहरण: Mahindra Bolero

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ये एक और महत्वपूर्ण वजह है जिसके कारण महिंद्रा बोलेरो को लोकप्रियता हासिल हुई है. जहां बात गड्ढों से भरे टूटी-फूटी सड़कों को पार करने कि होती है तो आम गाड़ियों के सांसें फूल जाती हैं. लेकिन जब आप बोलेरो या स्कार्पियो जैसी गाड़ियों में होते हैं तो ये दोनों गाड़ियाँ ऐसी सड़कों पर दौड़ने कि अपनी बादशाहत बिना किसी परेशानी के साफ़ साफ़ जतला देती हैं. अपनी सरल मूलभूत बनावट और उपकरणों के चलते इस गाड़ी की विश्वसनीयता और उम्र भी लम्बी होती है.

3. किफायतीपन और अच्छी री-सेल वैल्यू

बेहतरीन उदाहरण: KUV100

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महिंद्रा की गाड़ियों के लश्कर में KUV100 सबसे छोटी और किफायती गाड़ी है. 4.68 लाख रूपए की इसकी शुरूआती कीमत पर आज कि तारिख में आप एक किफायती मिड-साइज हैचबैक खरीद सकते हैं. आप जब इस सेगमेंट से ऊपर कि ओर जाते हैं तो आपको मिलती हैं कॉम्पैक्ट SUVs (जो एक और किफायती सेगमेंट है) और उसके बाद आती है बोलेरो, जो अपने आप में काफी सस्ती कार है.

महिंद्रा की गाड़ियों कि रीसेल पर अमूमन काफी अच्छे दाम मिल जाते हैं क्योंकि इन पुरानी गाड़ियों कि भी बाज़ार में अच्छी-खासी मांग रहती है. अगर आप अखबारों में कार विज्ञापनों पर एक नजर डालें तो पायेंगे कि पुरानी स्कार्पियो को भी बाज़ार में अच्छी खासी कीमत मिल जाती है.

4. पैसा-वसूल गाड़ियाँ

बेहतरीन उदाहरण: XUV500 and TUV300

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किसी गाड़ी का किफायतीपन और उसका पैसा-वसूल होना एक सी बातें लगती जरूर हैं लेकिन दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं. उदाहरण के लिए XUV500 को अपनी 15 लाख कि कीमत के साथ एक किफायती गाड़ी नहीं कहा जा सकता लेकिन इस गाड़ी में आपको फीचर्स की भरमार और AWD (आल-व्हील ड्राइव) जैसे विकल्प मिलते हैं जो इसी कीमत पर उपलब्ध अन्य प्रतिद्वंद्वी गाड़ियों में उपलब्ध नहीं है. इस कारण ही इन्हें हम पैसा-वसूल गाड़ियाँ कह सकते हैं. इस बात का एक और मजबूत उदाहरण है TUV300. इसकी कीमत विटारा ब्रेज्ज़ा औरएकोस्पोर्ट के मुकाबले काफी कम है और इसमें सात लोगों के लिए जगह भी है..

5. सडकों पर एक अलग ही शान की सवारी

बेहतरीन उदाहरण: Scorpio

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स्ट्रीट प्रजेंस या सड़क पर एक अलग ही शान रखने वाली कोई गाड़ी है तो वो है स्कार्पियो. आजकल बॉलीवुड निर्देशक भी अनेकों काली स्कार्पियो के सहारे अपनी फिल्मो के दृश्यों की तीव्रता बढ़ाने कि कोशिश करते हैं. यह कार अपनी खूबसूरत स्टाइलिंग के चलते सड़कों पर एक अलग ही शान के साथ चलती है. अपनी अच्छी स्ट्रीट प्रजेंस की वजह से स्कार्पियो को एक अलग ही सम्मान भी हासिल है. 2014 में आए इसके नए संस्करण का सामने का हिस्सा काफी आकर्षक बनाया गया है.

6. उपयोगिता

बेहतरीन उदाहरण: Thar, Scorpio 4-व्हील ड्राइव, Bolero 4×4

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महिंद्रा ने कार निर्माता के तौर पर अपनी शुरुआत यूटिलिटी वेहिकल्स (UV) बनाने के साथ ही कि थी और आज भी यह कम्पनी अपनी उन जड़ों से जुड़ी हुई है. ये कंपनी बहुत ही बढ़िया 4×4 SUVs बनाने के लिए मशहूर है और ये बात इस कम्पनी कि एक बड़ी ताकत है. भले ही आपको रोज़ाना कि उबड़-खाबड़ सडकों पर चलना हो या फिर ऑफ-रोडिंग करने का मन हो, महिंद्रा के पास आपके लिए स्कार्पियो 4WD, बोलेरो 4×4, और थार जैसे अनेकों विकल्प हैं जो आपको उन जगहों पर ले जाने का माद्दा रखते हैं जहाँ आम गाड़ियाँ जाने से घबराती हैं.

7. ऑटोमैटिक गाड़ियों कि सबसे बड़ी श्रृंखला

Mahindra Scorpio Automatic 2

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महिंद्रा एक ऐसी कार निर्माता कम्पनी है जिसको भारतीय बाज़ार कि सही समझ है. और ये बात साबित होती है कम्पनी द्वारा भारतीय बाज़ार में ऑटोमैटिक गियरबॉक्स वाली गाड़ियों कि सबसे बड़ी श्रृंखला उपलब्ध करवाए जाने से. अब भारत में लोगों ने मैन्युअल कार्स के बजाए ऑटोमैटिक कार्स को पसंद करना शुरू कर दिया है और महिंद्रा उनकी इस डिमांड को पूरा करने में लगी है. कम्पनी अपनी सब-कॉम्पैक्ट SUVs – TUV300 और नुवोसपोर्ट – में AMT (ऑटोमेटेड-मैन्युअल ट्रांसमिशन) गियरबॉक्स तो फुल-साइज़ SUVs – स्कार्पियो और XUV500 – में पारम्परिक ऑटोमैटिक गियरबॉक्स उपलब्ध करवा रही है.

8. पूरे भारत में सेल्स और सर्विस का मज़बूत जाल

महिंद्रा की एक बहुत बड़ी ताकत है पूरे देश में फैला कम्पनी की सेल्स और सर्विस का एक मज़बूत जाल. महिंद्रा की गाड़ियों को आप देश के किसी भी कोने में खरीद सकते हैं या इनकी सर्विस करवा सकते हैं. ये एक ऐसा मुद्दा है जिसको लोग कोई भी गाड़ी लेने के पहले पचास बार सोचते हैं. चूँकि कंपनी की छोटे शहरों में अच्छी पहुँच है इसलिए इस मामले में यह अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर है. लेकिन अगर हम कम्पनी कि डीलरशिप कि संख्या कि बात करें तो यह अन्य कई कंपनियों से पीछे चल रही है.

9. अपनापन

अमूमन आप पाएँगे कि छोटे-मोटे अपडेट और बदलावों के साथ महिंद्रा की गाड़ियों का जीवन काल काफी लम्बा होता है. ये कम्पनी के साथ साथ ग्राहकों के लिए भी उपयोगी बात है. ऐसा इसलिए कि इस वहज से इन गाड़ियों के स्पेयर पार्ट्स आसानी से उपलब्ध होते हैं और सड़क किनारे काम कर रहे मैकेनिक्स भी महिंद्रा की गाड़ियों से इतने परिचित हो जाते हैं कि इनकी सर्विस कहीं भी आसानी से कराई जा सकती है. नतीजतन बोलेरो या स्कार्पियो जैसी गाड़ियों का रख-रखाव बिना किसी परेशानी किया जा सकता.

10. बाज़ार के प्रति प्रतिक्रियात्मकता

बेहतरीन उदाहरण: 1.99-लीटर mHawk

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महिंद्रा की यूटिलिटी कार्स अनेकों रूप रंगों में उपलब्ध हैं. कम्पनी द्वारा विकसित किए गए इसके अधिकतर नए मॉडल्स बाज़ार के अच्छे शोध और ग्राहकों कि चाहत कि अच्छी समझ का नतीजा हैं. उदाहरण के लिए, कुंटो उन पहली कॉम्पैक्ट SUVs में से थी जिसे बाज़ार में उतारा गया था. KUV100 भी इस बात का एक अच्छा उदहारण है क्योंकि इसे उस वक्त उतारा गया था जब बाज़ार में क्रॉसओवर गाड़ियों कि मांग बढ़ रही थी. कंपनी ने एक और क्रांतिकारी फैसला तब लिया जब उसने कम क्षमता वाले 1.99-लीटर mHawk डीज़ल इंजन को बाज़ार में उतारा. यह कदम तब उठाया गया जब प्रशासन ने दिल्ली NCR क्षेत्र में 2-लीटर से ज्यादा क्षमता वाले इंजन कि गाड़ियों कि बिक्री और पंजिकरण पर प्रतिबंध लगाया दिया था.

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