इस तरह रखें बच्चे के दांतों की देखभाल

बच्चे की मुस्कान को बनाएं रखने के लिए उसके ओरल हेल्थ का ख्याल रखना जरुरी है। आपको जन्म के कुछ समय बाद ही बच्चे की ओरल हेल्थ की देखभाल करना शुरु कर देना चाहिए। ओरल हेल्थ का मतलब केवल बच्चे के दांतों से नहीं होता। बच्चे के दांत निकलने से पहले आप उसके मसूड़ों और जीभ को हर रोज साफ करें। दांत निकलने के बाद आप बच्चे को दिन में दो बार दो मिनट के लिए ब्रश कराएं। इससे बच्चे को दांत में दर्द, मसूड़ों में जर्म्स, कैविटी मसूड़ों में सूजन या दांतों का हिलना जैसी समस्याएं नहीं होगी। ओरल हेल्थ केवल आपके मुंह तक सीमित नहीं होती बल्कि खराब ओरल हेल्थ का प्रभाव आपके संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ता है इसलिए बच्चे के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए उसके दांतों की देखभाल कैसे करें, आइए जानते हैं।

Dental Care For kids: बच्चे के दांतों की देखभाल कैसे करें

  • दांतों को दिन में दो बार ब्रश करें
  • दिन में एक बार फ्लॉश करें
  • बच्चे को सोते समय दूध की बोतल ना दें
  • स्वस्थ आहार दें
  • एक साल की उम्र के बाद पेसिफायर का इस्तेमाल बंद कर दें

दांतों को दिन में दो बार ब्रश करें
बच्चे के दांत निकलने पर उसे दिन में दो बार ब्रश कराएं। एक बार नाश्ते के बाद और एक बार सोने से पहले। सॉफ्ट-ब्रिसल्ड टूथब्रश का इस्तेमाल करें। सर्कुलर मोशन में ब्रश कराएं और इसके साथ उनके मसूड़ें और जीभ को भी साफ करें।

दिन में एक बार फ्लॉश करें
बच्चे के मुंह में दो दांत आ जाने के बाद से आप उनके मुंह को साफ रखने के लिए फ्लॉश करना शुरु दें। इससे उनके दांतों के बीच फंसा खाना निकल जाएगा जिससे कैविटी की समस्या नहीं होगी।

बच्चे को सोते समय दूध की बोतल ना दें

सोते समय बच्चे के मुंह में दूध की बोतल ना लगाएं। ऐसा करने से बच्चे के दांत अधिक समय तक शुगर के संपर्क में रहेंगे जिससे कैविटी की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। बच्चे को 6 महीने बाद कप से दूध पिलाना शुरु करें।

स्वस्थ आहार दे

बच्चे के दांतों को स्वस्थ बनाने के लिए उन्हें स्वस्थ आहार दें। दांतों के स्वास्थ्य को बनाने के लिए कैल्शियम, विटामिन डी, विटामिन सी, बीटा कैरोटीन आदि पोषक तत्व जरुरी हैं इसलिए उनके आहार में ये पोषक तत्व शामिल करें।

एक साल की उम्र के बाद पेसिफायर का इस्तेमाल बंद कर दें
पेसिफायर एक रबर या सिलिकॉन निपप्ल होता है जिसे टीथर भी कहते हैं। दांत निकलने पर यह बच्चे को दिया जाता है। इस निप्पल का इस्तेमाल बच्चे की उम्र एक साल हो जाने पर बंद कर दें।

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