एक वक्त ऐसा था जब अस्थमा के कारण 100 मीटर भी नहीं चल पाते थे…सत्यरूप बने सबसे युवा पर्वतारोही

माउंट सिडले की ऊंचाई करीब 4285 मीटर है। सत्यरूप ने इसकी चोटी पर पहुंचकर तिरंगा फहराकर राष्ट्र गीत गाया और केक काटकर अपनी शानदार उपलब्धि का जश्न मनाया। पश्चिम बंगाल के सत्यरूप सिद्धांत ने 16 जनवरी को माउंट सिडेल को फतह कर इतिहास रच दिया है। सत्यरुप सिद्धांत सात पर्वतों और सात ज्वालामुखी फतह करने वाले सबसे कम उम्र के शख्स बन गए हैं।

सत्यरूप सिद्धांत विश्व के सात पर्वतों और सात ज्वालामुखी पर्वतों पर तिरंगा फहराने वाले पहले भारतीय भी हैं। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में उनका नाम शामिल किया जाएगा। सत्यरूप ने भारतीय समय के अनुसार सुबह 6. 28 मिनट पर सातवें ज्वालामुखी पर्वत माउंट सिडले को फतह किया। सत्यरूप ने 35 साल 9 महीने में यह उपलब्धि हासिल की है।

सत्यरूप अब तक अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो, रूस में यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्बरस, अर्जेंटीना में स्थित दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी अकाकागुआ, नेपाल में एशिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट, ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट कोजिअस्को और अंटाकर्टिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट विन्सनमैसिफ में तिरंगा फहरा चुके हैं। ये अपने आप में कमाल है।

सबसे दिलचस्प बात ये है कि बचपन में सत्यरूप अस्थमा के कारण इनहेलर के बिना 100 मीटर चलने में भी हांफ जाते थे, लेकिन उनके मन में अपनी इस कमजोरी से पार पाने का जुनून था। सत्यरूप ने खुद को पर्वतारोहण के लिए तैयार करने के लिए 7 साल तक कड़ी ट्रेनिंग की थी। बता दें कि सत्यरूप बीटेक की डिग्री लेेने के बाद बेंगलुरु में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर 2015 से सोल्यूशंस आर्किटेक्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इससे पहले सातों महाद्वीपों की सात चोटियों और सात ज्वालामुखी पर्वतों को सबसे कम उम्र में फतह करने का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के पर्वतारोही डेनियल बुल के नाम था। डेनियल बुल ने 36 साल 157 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी। सेवन समिट विजय के लक्ष्य के साथ सत्यरूप ने 30 नवंबर 2017 को अंटार्कटिका में माउंट विन्सन मैसिफ पर चढ़ाई कर अपने मिशन के लिए यात्रा शुरू की थी।

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