कैसे बचें? क्राइम शो के ‘जाल’ से …….

साइबर बुलइंग वो अपराध है, जब किसी को कंप्यूटर टेक्नोलॉजी द्वारा भयभीत किया या डराया धमकाया जाए। इसमें कंप्यूटर या फ़ोन द्वारा सोशल मीडिया, मैसेज, इमेल्स या वीडियो द्वारा डराया या धमकाकर परेशान किया जाता है। फेक वेबसाइट्स, प्रोफाइल्स या वीडियो वायरल करके लोगों से पैसा ऐंठा जाता है या ब्लैकमेल किया जाता है।

इसके द्वारा पीड़ित के विषय में गलत बातें या जानकरी ऑनलाइन पोस्ट किए जाते हैं, जहां अपराधी को ट्रेस करना मुश्किल होता है। वही बातें या पिक्चर्स, वीडियो इतनी जल्दी पूरी दुनिया में वायरल हो जाती है कि उसको रोकना या हटाना साइबर पुलिस द्वारा असंभव हो जाता है। ऐसी हरकत न सिर्फ पीड़ित को मानसिक रूप से परेशान या डिप्रेस्ड कर देती है, बल्कि उन्हें खुदखुशी करने पर भी मजबूर कर देती है।

इसके लिए कुछ बातें ध्यान रखनी ज़रूरी हैं…
1. प्रतिक्रिया या जवाब नहीं देना समझदारी होती है, क्योंकि अपराधी यही चाहता है कि पीड़ित परेशान हो जाए। ऐसा कदम अपराधी के हरकत को सफल कर देता है।
2. साइबर बुलइंग का एक अच्छा पक्ष ये है कि उस हरकत का सबूत रखा जा सकता है, जैसे चैट, ईमेल, पिक्चर इत्यादि जो किसी साइबर एक्सपर्ट, वकील या साइबर पुलिस के अधिकारी को दिखाया जा सकता है। इसलिए सारे सबूत सेव करना सही होगा। इंटरनेट सर्विस या कंटेंट प्रोवाइडर जैसे फेसबुक इत्यादि को तत्काल संपर्क करके, उन्हें खबर कर देना भी जुर्म से बचने का एक सहज तरीका है।
3. अधिकतर सोशल मीडिया साइट या वेबसाइट ऐसे टूल देते हैं, जिससे साइबर स्टॉकर या बुली को ब्लॉक या रोका जा सकता है, उस सुविधा का इस्तेमाल करना ज़रूरी है।
4. अपने पासवर्ड सुरक्षित कर लें, उससे तुरंत बदल लें और किसी से भी शेयर न करें।
5. अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल, पोस्ट्स, पिक्चर्स इत्यदि को सुरक्षित करें, प्राइवेट रखें और कुछ दिनों के लिए ऑफलाइन होना भी समझदारी है, जिससे साइबर बुली अनुपस्थिति देखकर परेशान करना बंद कर दे।

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