चुनावी बॉन्ड पर अपने अंतरिम आदेश में कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये हुई कमाई से जुड़ी सारी जानकारी अब राजनितिक दलों को चुनाव आयोग को देनी होगी

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को चुनावी बॉन्ड पर अपने अंतरिम आदेश में कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये हुई कमाई से जुड़ी सारी जानकारी अब राजनितिक दलों को चुनाव आयोग को देनी होगी. कोर्ट ने कहा कि बॉन्ड के जरिये मिली रकम की जानकारी सील कवर में सभी राजनीतिक पार्टियों को चुनाव आयोग के साथ साझा करनी होगी. उच्चतम न्यायलय के मुताबिक चुनाव आयोग इसे सेफ कस्टडी में रखेगा. आदेश के मुताबिक पार्टियों को मिली 15 मई तक की रकम की जानकारी मई के आखिर तक चुनाव आयोग को देनी होगी. आपको बता दें कि फिलहाल  चुनावी बॉन्ड पर कोई रोक नहीं लगेगी. इसे खरीदने के लिए दस दिनों का वक्त खत्म होगा.  
हालांकि कोर्ट के इस आदेश से याचिकाकर्ता खुश नहीं हैं. एडीआर के प्रोफेसर जगदीप चोकर ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है की राजनितिक दल सारी जानकारी चुनाव आयोग के साथ साझा करेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार ये कहती रही है कि इलेक्टोरल बॉन्ड गुमनाम हैं, इन पर किसी का नाम नहीं है. ऐसे में राजनीतिक दल ये कह सकते हैं कि बॉन्ड पोस्ट के माध्यम से उनके पास आए और इन पर भेजने वाले का नाम नहीं है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से पूछना चाहिए कि इलेक्टोरेल बॉन्ड किसने खरीदे और कितने रुपये में खरीदे. स्टेट बैंक को इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी सारी जानकारी सार्वजनिक करना चाहिए. 

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