छुट्टी बिताकर दो दिन पहले ड्यूटी पर लौटें रमेश, पुलवामा में शहीद

पुलवामा में हुए आतंकी हमले में बनारस के तोहफापुर गांव के रमेश यादव शहीद हो गए। वो दो दिन पहले ही गांव आ कर वापस गए थे. रमेश के शहीद होने की खबर से गांव में मातम पसर गया. शहीद रमेश के पिता एक दिहाड़ी मज़दूर है जो दूसरो के खेतों में काम करते है. वही रमेश अपने माँ -बाप के साथ पत्नी और एक डेढ़ वर्ष के बच्चे को पीछे छोड़ गए हैं.

घटना के दूसरे दिन भी शहीद के परिजनों का दर्द बांटने प्रशासन का कोई छोटा बड़ा अधिकारी नहीं पहुँचा. ग्रामीणों में इसको लेकर ख़ासा रोष हैं. इससे हम ये भी अंदाजा लगा सकते है की अधिकारी शहीदों के प्रति कितने असंवेदनशील है.

रमेश 2016 में सीआरपीएफ में भर्ती हो कर सच्ची लगन के साथ अपनी ड्यूटी कर रहे थे. वो कल आतंकियों के कायरना हमले में शहीद हो गए. वो 61वीं बटालियन में सिपाही के पद पर कर्यरत थे.

शहीद रमेश दो दिन पहले ही छुट्टी बिताकर अपनी ड्यूटी पर वापस लौटे थे. परिवार और रमेश को क्या पता था, की इस बार वो ऐसा तमगा ले कर घर आएंगे जो की गर्व तो मह्सूस कराएगा, लेकिन साथ ही एक ऐसा दर्द दे जायेगा जो ज़िन्दगी भर साथ रहेगा.

शहीद के पिता चाहते है की सरकार उनकी मदद करे क्यूंकी रमेश के बाद उनके परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है. एक भाई है जो अभी बेरोज़गार है. रमेश की पत्नी-बच्चे के साथ उनकी एक बूढी माँ हैं, जिन्हें वो पीछे छोड़ गए हैं. शहीद के पिता खुद दूसरों के खेतों में काम करते हैं. शहीद के पिता का कहना है कि सरकार आतंकियों पर कठोर कार्यवाही करे.

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