जानें कैसे हुई ‘मां’ शब्‍द की उत्‍पत्ति और क्‍या है गोवंश से इसका नाता

हिंदू धर्म में गाय को ‘मां’ (Maa) का दर्जा प्राप्‍त है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी गाय को माता कहकर उनकी पूजा की है। धार्मिक मान्यता है कि गाय के प्रत्येक अंग पर किसी ना किसी देवता का वास होता है इसलिए गौ पूजा से सभी देवताओं की पूजा का फल एक साथ प्राप्त हो जाता है।

पुराणों और धर्मशास्‍त्रों में गोवंश के महत्‍व को बताते हुए कहा गया है कि सृष्टि रचयिता ब्रह्माजी ने सृष्टि की कामना की थी तो उन्‍होंने सभी प्राणियों की रक्षा और भरण-पोषण के लिए गोवंश की रचना की थी। ब्रह्मवैवर्त पुराण में भगवान श्रीकृष्ण का निवास गोलोक में बताया गया है। पुराणों में यह भी बताया गया है कि नियमित रूप से गाय की सेवा और पूजन करने वाले मनुष्‍यों को देवताओं की कृपा प्राप्‍त होती है। आइए जानें गोवंश को लेकर कैसी-कैसी मान्यताएं और धार्मिक विश्वास हैं।

ऐसे हुई मां शब्‍द की उत्‍पत्ति

सभी जीवों में एक मात्र गाय ही ऐसा प्राणी है जिसकी वाणी में मां (Maa) शब्द की ध्वनि सुनाई देती है। गाय का बछड़ा जब आवाज लगता है तो मां शब्द की अनुभूति होती है। ऐसी मान्यता है कि मनुष्यों ने गौवंश से ही मां शब्द को ग्रहण किया है। श्रीकृष्ण लीला में बहुला गाय की कथा मिलती है जो गाय के स्नेह और ममता रूपी भाव के साथ उसकी वचनबद्धता को दर्शाती है जो केवल माता में हो सकती है।

गोभक्‍तों की इच्‍छाएं होती हैं पूरी

भविष्‍य पुराण में बताया गया है कि गोभक्‍त मनुष्‍य जिस भी वस्‍तु की इच्‍छा करता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है। महिलाओं द्वारा गोवंश की पूजा करने से पति को दीर्घायु की प्राप्ति होती है। संतान की कामना करने वाले दंपत्ति के लिए भी गोमाता की पूजा करना लाभकारी बताया गया है। धन चाहने वाले को धन और धर्म की चाह रखने वाले को धर्म की प्राप्ति होती है।

गाय के सींग में त्रिदेवों का वास

भविष्‍य पुराण में बताया गया है कि गौ के सींग की जड़ में ब्रह्मा और विष्‍णु प्रतिष्ठित हैं और सींग के मध्‍य में समस्‍त तीर्थ उपस्थित हैं। महादेव शिव भी सींगों के मध्‍य में प्रतिष्ठित हैं। गौ के लालट में गौरी और नासिका के अग्र भाग में भगवान कार्तिकेय प्रतिष्ठित हैं।

गाय की सांसों में है यह अद्भुत शक्ति

ऐसी मान्यता है कि गाय की सांसों में एक विशेष प्रकार की शक्ति होती है। गाय जहां बैठती हैं, वहां के वातावरण को शुद्ध करने के साथ ही वहां की तमाम नकारात्मक उर्जा को सोख लेती है। कुछ महीनों तक जहां गाय नित्य वास करती है वहां लक्ष्मी का वास हो जाता है। उस भूमि पर घर बनाने से वास्तु दोष नहीं लगता है।

गाय के महत्व का वैज्ञानिक कारण

गाय की सींग की बनावट पिरामिड जैसी होती है। माना जाता है कि यह आकाशीय उर्जा को अवशोषित करती है। यह आकाशीय उर्जा दूध के माध्यम से मनुष्यों को प्राप्त होता है जिससे रोगों से बचाव और बल प्राप्त होता है। ऐसी धारणा भी है कि गाय के गोबर में रेडियोऐक्टिविटी को निष्क्रिय करने की क्षमता होती है।

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