बार-बार पैरों में सूजन और पाचन संबंधी होती है दिक्कत,तो हो सकती हैं ओवरी कैंसर की शिकार

ओवरी कैंसर महिलाओं में ही होता है। अगर हम समय रहते ही अपने में कुछ बदलाव कर लें, तो ओवरी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को मात दे सकते हैं। इसलिए आज हम आपको विश्व कैंसर दिवस से पहले महिलाओं में होने वाले ओवरी कैंसर के कारण, लक्षण और उसके उपचार बता रहे हैं।

ओवरी कैंसर के लक्षण :

पेट में पानी भर जाने से बड़ा हो जाना, पेट के निचले हिस्से या पेंडू में सूजन, ऐंठन और दर्द, पाचन संबंधी समस्याएं, भूख कम लगना, पेट भरा-भरा महसूस होना, मूत्र त्यागने की बार-बार जरूरत महसूस होना, कैंसर कोशिकाओं के नसों में दबाव डालने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन का धीमा होना। पूरे शरीर और पैरों में सूजन आना, कैंसर कोशिकाओं के यूटेरस में पहुंचने से कभी-कभी असामान्य रूप से थोड़ी बहुत ब्लीडिंग भी होती है।

ओवरी कैंसर के कारण :

महिलाओं में इंफर्टिलिटी होने या पहला बच्चा 35 साल की उम्र के बाद बहुत देर से होने पर, कम उम्र 8-10 साल में पीरियड्स शुरू होने और देर तक कम से कम 50 साल की उम्र तक रहने पर। वेजाइना एरिया में टेलकम पावडर का इस्तेमाल करना जो वेजाइना के माध्यम से ओवरी तक पहुंच जाता है, हार्मोन असंतुलन होना, स्तनपान न कराना या कम कराना, एल्कोहल और स्मोकिंग की लत होना और मोटापा, इसके कारण हो सकते हैं।

ओवरी कैंसर के उपचार :

महिलाओं को इन लक्षणों में से 2-3 दिखाई पड़ें तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए। अल्ट्रासाउंड से ओवरी कैंसर की स्थिति की जांच की जाती है। इलाज ऑपरेशन और कीमोथेरेपी से किया जाता है। ओवरी, यूटेरस, आस-पास के लिंफ नोड्स, फैट सेल्स, पेट में पेरिटोनियम मेंब्रेन को निकाल दिया जाता है।

ओवरी कैंसर के रोकथाम

40 साल के बाद हर महिला को पेट का अल्ट्रासाउंड साल में एक बार जरूर करवाना चाहिए।

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