बिहार में राष्ट्रीय जनता दल स्थापना के बाद पहली बार 40 में से मात्र 20 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ेगी

बिहार में शनिवार को महागठबंधन के सहयोगियों के बीच सीटों के समझौते पर औपचारिक घोषणा हुई. इस घोषणा के अनुसार राष्ट्रीय जनता दल पहली बार स्थापना के बाद से मात्र 20 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ेगी. उसने अपने पांच सहयोगियों के लिए 20 सीटें छोड़ी हैं. आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव की महागठबंधन के सहयोगी दलों के प्रति इस उदारता के पीछे कई कारण हैं.
सीटों के इस समझौते से साफ है कि आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव ने अपने सहयोगियों को उनकी क्षमता के अनुसार या उनके बारे में अपने आकलन के अनुसार सीटें दीं. इस बार के सीटों के समझौते से यह भी साफ है कि लालू यादव को इस बात का अंदाजा हो गया है कि उनका परंपरागत मुस्लिम-यादव वोट बैंक उन्हें चार से अधिक सीटें जिता पाने में कामयाब नहीं होगा. साथ ही उनको यह भी अंदाजा है कि इस बार नीतीश कुमार उनके साथ न होकर उनके विरोधी एनडीए के साथ हैं और नीतीश के साथ खास तौर पर एक ऐसा मजबूत वोट बैंक है जिसका मुकाबला करने के लिए उन्हें अपने साथ हर छोटी-बड़ी पार्टी को एकजुट रखना होगा.
हालात को समझते हुए ही शायद लालू यादव ने मात्र नौ सीटें कांग्रेस को दीं जिससे कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व उनसे खुश तो नहीं ही होगा, लेकिन लालू यादव ने यह जोखिम लिया. उन्होंने छोटी पार्टियां, जैसे उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को पांच और जीतन राम मांझी और मुकेश मल्लाह की पार्टी को तीन-तीन सीटें देने का अपना वादा पूरा किया. साथ ही साथ पार्टी के कई नेताओं के आग्रह पर लालू यादव सीपीआई-माले को एक सीट पर समर्थन देने के लिए तैयार हो गए हैं.

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