यहां जान लें त्रेतायुग का सबसे बड़ा रहस्य…आखिर कब और कैसे हुई थी भगवान श्रीराम की मृत्यु

भगवान श्रीराम (Lord Ram) के जीवन की हर घटना शिक्षाप्रद है। उनके जीवन से जुड़े अनेक स्थान आज भी खामोशी से उस दौर की कहानी कहते हैं। उन्हीं कहानियों में एक सवाल छुपा है कि – भगवान राम ने अपनी देह कैसे त्यागी थी?

उस समय हनुमानजी के कारण राम (Lord Ram) द्वारा देह त्याग की घटना टल सकती थी, लेकिन राम ने एक ऐसी वस्तु ढूंढने के लिए उन्हें भेज दिया कि उसमें काफी समय लग गया। इस प्रकार राम ने देह का त्याग कर दिया। क्या थी वह संपूर्ण घटना, जानिए यह कहानी।

जब राम को यह ज्ञात हुआ कि पृथ्वी पर उनके आने का लक्ष्य पूर्ण हो चुका है, तब उन्होंने यहां से प्रस्थान करना चाहा। उस समय हनुमानजी भी अयोध्या नगरी में थे। जहां हनुमानजी होते हैं, वहां यमराज प्रवेश नहीं कर सकते।

अत: यमराज ने अपनी यह दुविधा भगवान राम को बताई। यह सुनकर राम ने एक उपाय किया। उन्होंने अपनी अंगूठी महल के फर्श में स्थित एक छिद्र में गिरा दी। हनुमानजी भगवान की अंगूठी ढूंढऩे लगे।

हनुमानजी ने उस छिद्र में प्रवेश किया। वह बहुत गहरा था और नीचे नागलोक तक जाता था। हनुमानजी लगातार अपने मार्ग में बढ़ते जा रहे थे। आखिरकार वे नागलोक पहुंच गए। वहां उनकी भेंट नागों के राजा वासुकी से हुई। नागलोक में अंगूठियों का ढेर लगा था। वासुकी ने कहा कि आप इस ढेर में से भगवान की अंगूठी ढूंढ़ लें।

हनुमानजी अंगूठी ढूंढऩे लगे। वहां राम शब्द लिखी अनेक अंगूठियां थीं। हनुमानजी चिंतित थे… किस अंगूठी को भगवान राम की अंगूठी मानें? वे हर अंगूठी को बहुत गौर से देखने लगे। वे सभी अंगूठियां एक जैसी थीं। अब तक हनुमानजी इसका रहस्य समझ गए थे। उन्हें संसार की क्षणभंगुरता एवं श्रीराम द्वारा देह त्याग का ज्ञान हो गया था।

इस कथा में हनुमानजी एवं यम का उल्लेख किया गया है। जहां हनुमानजी होते हैं, वहां यम का प्रकोप नहीं होता। इसके अलावा शनिदेव भी हनुमानजी के भक्त का अनिष्ट नहीं कर सकते। इसलिए जिस जातक को शनि प्रकोप एवं स्वास्थ्य संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, उसे हनुमानजी का नित्य पूजन करना चाहिए, जरूर लाभ होगा।

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