जानिए क्यों 2 कब्र के बीच सो रहा ये बच्चा…

सीरिया की कहकर कई फर्जी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. इनके कई मकसद हो सकते हैं. लोगों को भड़काना. लोगों की भावनाएं उमेठकर अपने लिए क्लिक्स बटोरना. अपना अजेंडा पूरा करना. मैं आपको कुछ मिसाल देती हूं.

हम और आप कभी नहीं मिले. हम एक-दूसरे को नहीं जानते. मगर बहुत मुमकिन है कि सोशल मीडिया पर मैंने जो देखा हो, वो आपने भी देखा हो. कोई वीडियो. कोई फोटो. कोई खबर. कोई पोस्ट. कुछ न कुछ. सोशल मीडिया पर हमारे देखने में बहुत कुछ ऐसा है, जो एक जैसा है.

मुझे पिछले कुछ वक्त से लगातार सीरिया की तस्वीरें दिख रही हैं. खूब सारी. लोग शेयर कर रहे हैं. तकलीफ जता रहे हैं. और ये सब देखकर मुझे कोफ़्त हो रही है. नहीं, इसकी वजह ये नहीं कि मुझे सीरिया के बारे में नहीं पता. मैं जानती हूं कि पिछले आठ साल (मार्च 2011) से सीरिया में जंग चल रही है. लाखों लोग बेघर हुए. लाखों लोग मारे गए. लाखों रिफ्यूजी बनने को मजबूर हुए. लाखों अपंग हो गए. लाखों ने अपना परिवार खोया. लाखों भुखमरी के शिकार हुए. इन लोगों ने जो देखा, वो किसी और को न देखना पड़े. जो इन्होंने भुगता और भुगत रहे हैं, वो हमारी कल्पना से भी ज्यादा भीषण है. तो सीरिया के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को पता चले, तो अच्छा है. लोग जागरूक हों, संवेदनशील बनें, तो बहुत अच्छा है. मगर सोशल मीडिया पर सीरिया के नाम पर कुछ ऐसा भी हो रहा है, जो सही नहीं है. फर्जी है.

इस फोटो को सीरिया का बताकर प्रचारित किया गया. जबकि ये फोटो सऊदी के एक फटॉग्रफर ने ली थी. फोटो में दिख रहा बच्चा उसका भांजा है. और ये तस्वीर एक आर्ट प्रॉजेक्ट के लिए ली गई थी.

1. 7-8 साल का एक बच्चा. कंबल ओढ़कर लेटा हुआ. दाहिने और बाएं दो कब्रें. शायद ताजा हैं. क्योंकि उनके ऊपर बिछी मिट्टी भुरभुरी लग रही है. इस तस्वीर पर एक कैप्शन हुआ करता था. कि बच्चा अपने मां-बाप की कब्रों के बीच में सो रहा है. और ये तस्वीर सीरिया की है. ये फोटो बहुत वायरल हुई. दुनियाभर में. अब अगर मैं आपके कहूं कि ये फोटो सीरिया की नहीं है, तो? अगर मैं कहूं कि हम इसे जो समझते रहे, वो ये नहीं है, तो?

ये तस्वीर सीरिया की नहीं है. और न ही तस्वीर में नजर आ रहा बच्चा अपने मां-बाप की कब्र के बीच में सो रहा है. बल्कि वो जो दो कब्र जैसी चीजें दिख रही हैं, वो असल में कब्र हैं ही नहीं. उन्हें इस तरह से बनाया गया है कि वो देखने वालों को कब्र जैसी दिखें. और सबसे जरूरी बात- तस्वीर में जो बच्चा सो रहा है, उसके मां-पिता की मौत नहीं हुई. फोटो लिए जाते समय वो जिंदा थे.

फटॉग्रफर ने इस फोटो को फेसबुक पर पोस्ट किया. फिर ये तस्वीर फैलने लगी. लोगों लिखने लगे कि ये सीरिया की है. ये ही कहानी फैलने लगी.

ये फोटो सऊदी अरब की है. जिस फटॉग्रफर ने फोटो ली है, उसकी बहन का बेटा आपको फोटो में सोता हुआ दिख रहा है. फोटो खींचने वाले का नाम अब्दुल अजीज अल ओतैबी है. ये फोटो एक ऑर्ट प्रॉजेक्ट के सिलसिले में ली गई थी. वो ये दिखाना चाहते थे कि बच्चे को अपने मां-बाप से जो मुहब्बत होती है, उसकी जगह कोई और नहीं ले सकता. इसकी भरपाई किसी भी और चीज से नहीं की जा सकती. अब्दुल ने ये फोटो फेसबुक पर डाली. और वहीं से कुछ लोग इसे ले उड़े. इसको सीरिया का बताकर सोशल मीडिया पर घुमाया गया. और ये वायरल हो गया. मुसलमानों के साथ हो रहे अन्याय के नाम पर मासूम बच्चों और युवाओं का ब्रेनवॉश करने वाले आतंकवादी संगठनों ने भी इसका खूब इस्तेमाल किया.

2. ये वाली फोटो भी खूब वायरल हो रही है. इसे देखिए और आपको एक किस्म की सनसनी महसूस होगी. 2012 जैसी किसी फिल्म का सीन याद आएगा. कि आदमी बेतहाशा भागा जा रहा है. और उसके पीछे दुनिया खत्म होती जा रही है. मानो कोई जलजला सब कुछ लीलते हुए अब उसकी ओर बढ़ रहा है. ताकि उसे भी भकोस जाए. और इस जलजले के बीच एक आदमी अपनी रोती हुई बच्ची को गोद में उठाए भाग रहा है. कितना खौफनाक मंजर होगा ये!

ये मोसुल की तस्वीर है. इंटरनेट पर खोजिए, तो ये फोटो और इसके पीछे की कहानी तुरंत जान जाएंगे.

ये फोटो सही है. मगर ये सीरिया की नहीं है. ये है सीरिया के पड़ोसी इराक की. ठीक-ठीक कहें, तो वहां के मोसुल प्रांत की. अक्टूबर 2016 में इराक, अमेरिका और साथी फौजों ने मोसुल में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ सैनिक कार्रवाई शुरू की. भीषण युद्ध हुआ. अमेरिका और साथी देश आसमान के रास्ते बम गिरा रहे थे. जमीन पर इराकी फौज और ISIS के आतंकी लड़ रहे थे. भयंकर हिंसा हुई. हजारों लोग मारे गए. ISIS ने मोसुल में फंसे बेगुनाह लोगों को अपनी ढाल बनाना शुरू किया. लोग जैसे-तैसे ISIS के कब्जे वाले मोसुल से जान बचाकर भाग रहे थे. ये तस्वीर तब की ही है. तस्वीर में नजर आ रहा आदमी अपनी बच्ची को लेकर सुरक्षित इलाके की तरफ भाग रहा है. पीछे और भी लोग हैं. जो हाथ लगा, वो समेटकर भागे आ रहे हैं.

ये न्यू यॉर्क डेली न्यूज की वेबसाइट से लिया गया स्क्रीनशॉट है. खबर की तारीख देखिए. और खबर की शुरुआती लाइनें भी पढ़ लीजिए.

3. ये तस्वीर देखिए. ये भी हद विनाशक है. रूह जैसी कोई चीज होती होगी बदन में, तो वो कांप जाएगी. इसको भी सीरिया का बताकर टहलाया जा रहा है. कि देखो, रूस और बशर अल-असद की सेना लोगों के ऊपर किस तरह बम गिरा रही है. रूस और असद फौज बेशक बमबारी करा रही है सीरिया पर. मगर ये तस्वीर सीरिया की नहीं है. ये 2014 की फोटो है. पूर्वी गाजा पट्टी की. इजरायल के लड़ाकू विमानों ने यहां हवाई बमबारी की थी. 70 बम गिराए थे. गाजा पट्टी के इकलौते पावर प्लांट पर भी हमला किया था. ग्लोबल लुक प्रेस के सामेह रहमी ने अपने कैमरे से ली थी ये फोटो.

4. ये फोटो असली है. ये सच में एक युद्ध के दौरान ली गई. मगर जहां ये खींची गई, वो जगह सीरिया नहीं है. ये यमन की फोटो है. यमन, जहां सऊदी अरब बमबारी कर रहा है. और अमेरिका उसकी मदद कर रहा है. अरब स्प्रिंग के बाद इस इलाके में जो लोकतंत्र और बदलाव की आंधी आई, उसमें एक भागीदार यमन भी था. वहां के हूती विद्रोहियों को ईरान ने सपोर्ट किया. शासक सुन्नी था, तो उसे सऊदी से सपोर्ट मिला. और पहले से ही गरीबी की मार झेल रहा यमन नरक बन गया. वहां भी लोग मर रहे हैं. कत्ल किए जा रहे हैं. भुखमरी के शिकार हो रहे हैं.

2011 में सीरिया का गृह युद्ध शुरू हुआ था. ये फरवरी, 2013 की फोटो है. ये अलेप्पो के अर्द-अल-हेमरा की तस्वीर है. मिसाइल हमले के बाद एक आदमी सिर पर हाथ रखकर मातम मना रहा है. ये फोटो भी पांच साल पुरानी है. इन पांच सालों में वहां बहुत कुछ बदल गया. कई और शहर, कई और इलाके जमींदोज हो गए. लाखों लोग मारे गए.


सीरिया में जो हो रहा है, वो हिंसक कुश्ती है. लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए शुरू हुई लड़ाई शिया-सुन्नी की जंग में बदल गई. राष्ट्रपति बशर अल-असद शिया हैं. बहुसंख्यक आबादी सुन्नी है. असद ने विद्रोहियों के खिलाफ जमकर हिंसा की. विद्रोह हिंसक होता चला गया. फिर बाहरी खिलाड़ी भी कूद पड़े. ईरान शिया है. तो उसने असद को सपोर्ट किया. सऊदी, UAE जैसे सुन्नी देश विद्रोहियों को फंडिंग देने लगे. फिर इस्लामिक स्टेट (ISIS) से लड़ने के बहाने अमेरिका भी आ गया. उसने भी विद्रोही गुटों की मदद की. असद ने रूस से मदद मांगी. रूस भी मदद देने आ गया. एक सीरिया में कई मोर्चे खुल गए. जंग का मैदान दिनोदिन और बड़ा होता गया.

आंकड़ों के मुताबिक, 2017 तक सीरिया में पांच लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके थे. कई मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, ये आंकड़े काफी कम हैं. असली संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है.


इसमें कोई शक नहीं कि रूस और असद की फौज विद्रोहियों के कब्जे वाले शहरों पर, इलाकों पर बमबारी करती है. मगर दूसरी तरफ वाले भी चुप नहीं. अमेरिका और उसके सहयोगी ये साबित करने पर लगे हैं कि रूस और असद खलनायक हैं. और अमेरिका (साथ में नाटो) मानवता के रक्षक. जबकि ऐसा कतई नहीं है. दोनों ही पक्ष विलन हैं. इस सबके चक्कर में बेगुनाह नागरिक मारे जा रहे हैं. निर्दोष आम लोग झेल रहे हैं.

सोशल मीडिया पर सीरिया के नाम से जो झूठ फैलाया जा रहा है, उसके पीछे सबसे बड़ा हाथ दुष्प्रचार तंत्र का है. जो कहीं की ईंट-कहीं का रोड़ा जमा करके प्रोपगेंडा फैला रहा है. सोशल मीडिया के कारण इस दुष्प्रचार में खूब सहूलियत मिलती है. ज्यादातर लोग इसे सही समझ बैठते हैं. सीरिया पर ध्यान दिया जाना चाहिए. उसके बारे में बात की जानी चाहिए. सीरिया में जो हो रहा है, उस पर आंसू बहाए जाने चाहिए. लेकिन इन सबके लिए फर्जी और झूठी तस्वीरों की जरूरत नहीं. वहां सच में जो हो रहा है, वो खुद ही इतना अमानवीय है. इतना खौफनाक है.

 

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