यहाँ 172 धागे को मशीन में पिरोकर बनाया जाता है मौत का फंदा….

यकीनन नहीं जानते होंगे, क्योंकि देश में आप ही नहीं बल्कि कई लोग ऐसे हैं जो नहीं जानते कि देश का ऐसा एकमात्र कौन सा जेल है जहां फांसी का फंदा तैयार होता है? चौंकिए मत, यह जेल बिहार के बक्सर का सेन्ट्रल जेल है।

दरअसल, बक्सर के सेन्ट्रल जेल में फांसी देने वाली रस्सी मनिला का निर्माण ब्रिटिशकाल से होता रहा है। इस जेल में अंग्रेजी शासनकाल में बनी मशीन है। इसी मशीन की मदद से फांसी का फंदा बनाने वालों की टीम 20 फीट मनिला रस्सी बनाती है। इसी से कैदियों को फांसी दी जाती है। एक मनिला रस्सी बनाने में 172 धागे को मशीन में पिरोकर घिसाई के बाद इसे बनाया जाता है। सबसे बेहतर धागा के लिए जे-34 रूई का इस्तेमाल किया जाता है।

 

कुल आठ लच्छी को रात में गंगा नदी के किनारे से आने वाली नमी और ओस से मुलायम किया जाता है। कुल तीन रस्सी को एक साथ मशीन में घुमाकर मोटी रस्सी बनती है। इस प्रक्रिया से गुजर कर कुल 20 फीट लंबी रस्सी बनाई जाती है जो एक शख्‍स को फांसी देने के लिए पर्याप्त है। बताया जाता है कि मार्च 2013 से अभी तक 27 से ज्यादा मनिला रस्सी देश के विभिन्न जेलों में भेजा जा चुका है।

सबसे बड़ी बात यह है कि बक्सर का यह सेन्ट्रल जेल गंगा नदी के किनारे होने के कारण फांसी का फंदा यानी की मनिला रस्सी बनाने में ज्यादा कारगर है। फंदा बनाने के दौरान नमी की बहुत जरूरत होती है, जिससे रस्सी मुलायम और मजबूत होती है। ब्रिटिश काल से ही बक्सर जेल के कैदी मौत का फंदा तैयार कर रहे हैं। इसकी वजह यह है कि वहां के कैदी इसे तैयार करने में माहिर माने जाते हैं।

सजायाफ्ता कैदियों के लिए तय काम और प्रशिक्षण में एक मौत का फंदा तैयार करने का हुआ करता था। पुराने कैदी नए कैदियों को जूट और रस्सी के अन्य उपयोग की चीजों के अलावा फंदा बनाने का प्रशिक्षण देते थे। बक्सर जेल में यह सिलसिला अब भी जारी है।

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