700 साल पुराने पेड़ को बचाने के लिए चढ़ाई जा रही है ग्लूकोज़ की बोतलें….

इस बरगद के पेड़ को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बरगद का पेड़ माना जाता है। 700 साल पुराने इस बरगद के पेड़ का अस्तित्व संकट में है और इसे बचाने के लिए जद्दोजहद चल रही है। अब इसे सलाइन ड्रिप चढ़ाकर फिर से जीवित करने के लिए यह कोशिश की जा रही है। वनस्पति विज्ञानी इस पेड़ को केमिकल की ड्रिप चढ़ा रहे हैं। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक इसकी शाखाओं में कीड़े लग चुके हैं। पेड़ पर दीमक का प्रकोप इतना है कि वह इसे खोखला किए जा रहे हैं

बरगद के पेड़ में कीटनाशक केमिकल से भरी सैकड़ों बोतलें पेड़ पर लटकाई गई हैं। इंजेक्शन के जरिए इस केमिकल को शाखाओं और तनों में पहुंचाया जा रहा है ताकि यहां पनप रहे कीड़ों को खत्म किया जा सके। सैकड़ों साल पुराना यह पेड़ महबूब नगर के पिल्लामर्री इलाके में है। ये पेड़ तीन एकड़ जमीन पर फैला हुआ है। माना जा रहा है कि यह दुनिया का दूसरा सबसे विशालकाय पेड़ है। इस पेड़ की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि इसे देखने के लिए दूर-दूर से सैलानी आते हैं। लेकिन पेड़ की सेहत खराब होने कारण दिसंबर से पर्यटकों का आना-जाना प्रतिबंधित किया जा चुका है।

वन विभाग ने अधिकारियों ने सलाइन ड्रिप में इंजेक्शन से डाल्यूटेड केमिकल्स मिलाया। इस तरह से सैकड़ों बोतलें तैयार की गईं। फिर बोतलों को पेड़ में दो-दो मीटर की दूरी पर लटकाया गया। सलाइन चढ़ाने के अलावा पेड़ का दो और तरीके से भी इलाज किया जा रहा है। पेड़ की जड़ों में केमिकल डायल्यूटेड पानी डाला जा रहा है। वहीं पेड़ को सपोर्ट देने के लिए आस-पास कंक्रीट का स्ट्रक्चर बनाया गया है, जिससे पेड़ की शाखाओं को सपोर्ट मिल सके और वो न गिरे। जिलाधिकारी रोनाल्ड रॉस ने कहा कि वो व्यक्तिगत तौर पर इस पेड़ के इलाज की निगरानी कर रहे हैं। अब पेड़ की हालत स्थिर है। जल्द ही यहां फिर से पर्यटक आ सकेंगे।

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