जी हां आपने सोच भी नहीं होगा.. एक मोबाइल एप ने बदल दी इस गांव की तस्वीर, अब 24 घंटे आती है बिजली

 सरकार स्मार्ट सिटी का एंजेडा लिए हर बार चुनाव मैदान में उतरती हैं। बहुत कम ऐसे गांव है जहां लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिल पाती है। लेकिन उत्तर प्रदेश के एक गांव में अब रोशनी से बल्ब जगमागा उठे हैं, फोन पर वाई-फाई भी कनेक्ट होने लगा है साथ ही गांव के हर चौराहे पर सीसीटीवी कैमरा और स्ट्रीट लाइटें भी लग गये हैं।

गांव ताधकपुर, कानपुर से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और ये गांव.. अन्य गांवों से अलग भी है। हम ऐसा क्यों कह रहे हैं चलिए आपको बताते है इसके पीछे की कहानी

इस गांव के दो आईटी पेशेवरों ने इस गांव का भाग्य को बदलने का फैसला किया। मुंबई के एक बिजनेसमैन योगेश साहू और विदेश में काम करने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर रजनीश बाजपेई ने मोबाइल प्रौद्योगिकी और इंटरनेट के साथ यूपी में गांव में क्रांतिकारी लाने का लक्ष्य रखा है। आप एक शहर के निवासी हैं, आपके पास वाईफाई, सार्वजनिक स्थानों में सीसीटीवी कैमरे, नियमित बिजली की आपूर्ति और सड़क पर स्ट्रीट लाइटें की सुविधा होगी। इन्ही सारी सुविधाओं को  गांवों तक पहुंचाने का सपना साहू और वाजपेई ने देखा। गांव पर हमेशा से बनी रहने वाली धारणा को साहू और बाजपेई बदलना चाहते थे।

अब आप सोच रहें होंगे कि ये संभव कैसे हुआ, ये सारी सुविधाए गांव में किस तरह लाई गयी। तो चलिए हम आपको बताते हैं यह सब एक मोबाइल ऐप के के जरिए हुआ। अरे भई चौकिएं मत एक मोबाइल एप ने गांव के हर घर को रोशन कर दिखाया है। दरअसल दरअसल इन लोगों ने स्मार्ट गांव नाम से एक मोबाइल एप बनाया है। ‘स्मार्टगांव’, ऐप  ऐसा एप है जो आंतरिक रूप से शहर को गांवों के साथ गांव को जोड़ता है। यह एक सूचना केंद्र है जहां गांवों में किए गए सभी कामों का रिकॉर्ड मोबाइल एप में दर्ज होता है। गांव के लोग अब समाचार और घटनाओं के साथ-साथ स्वास्थ्य और सूचना केंद्रों तक पहुंचने के लिए ऐप खोल सकते हैं। इस मोबाइल के जरिए गांव का संपर्क पूरी दुनिया से हो गया है। इस एप के जरिये किसानों को अपने उपज के लिए बाजार की जानकारी मिलती है। गांव में जो कुछ विकास के काम होते हैं उसे इस एप के जरिये रिकॉर्ड, ट्रैक और मॉनिटर किया जा सकता है।

इस छोटे से एप के जरिए ही  दोनों ने गांव सीसीटीवी कैमरे, सड़क रोशनी, स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम,  18-20 घंटे बिजली और एक वाईफाई ला पाए। आप कह सकते हैं कि यह गांव अब स्मार्ट गांव बन गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक तीन साल तक सरकारी अधिकारियों के साथ काम करते हुए साहू और बाजपेई ने इस गांव की तस्वीर बदल दी। इस गांव में 48 घंटों के भीतर 242 शौचालय भी बनाए गये हैं।

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