हिरण निगलकर इस अजगर ने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती की

एक कहावत है, ‘અતિ ને ગતી ન હોય’. इसका मतलब होता है किसी भी चीज़ की अति नहीं करनी चाहिए. कहने का मतलब है कि जितना पचा सको, उतना ही खाना चाहिए. ये कहावत फ्लोरिडा के एक पार्क में सच होती दिखी. जब एक 14 किलो वजनी और 11 फीट लंबे पायथन (अजगर की एक प्रजाति) ने खुद के वजन से ज़्यादा भारी हिरण के एक बच्चे को निगल लिया. निगल तो लिया लेकिन वो बच्चा उसके पेट में ही फंस गया. अब वो ना उसे निगल पा रहा था, ना उगल पा रहा था. इससे उस पायथन को तकलीफ भी बहुत हो रही थी. इसलिए उसे मारना पड़ा.

फ्लोरिडा में कंज़रवेंसी ऑफ साउथ-वेस्ट नाम की एक संस्था है, जो वन्य जीवों के पुनर्वास के लिए काम करती है. 2015 में इसके एक लाइफ बायोलॉजिस्ट को कोलियर सेमिनल स्टेट पार्क में टहलते वक्त ये पायथन इस हालत में मिला था. उन्होंने इसकी फोटो खींच ली. पिछले तीन साल से वो उस पर रिसर्च वगैरह कर रहे थे. 2018 में अब उन्होंने वो फोटो रिलीज़ की है. वो एक बर्मन मूल का पायथन था. ये पायथन आम तौर पर अमेरिका में नहीं, साउथ-ईस्ट एशिया के देशों (सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया जैसे देश) में पाए जाते हैं.

पायथन का निगला हिरण का बच्चा. Photo: Conservancy of Southwest Florida.

अमरीकी देशों के लोग पहले इन्हें पालते थे. लेकिन 70 के दशक में वो इन्हें जंगलों में छोड़ने लगे. इसकी वजह से जंगलों में इनकी संख्या बढ़ गई. बायोलॉजिस्टों का मानना है कि पायथन के हिरण को निगलने का प्रयास वाली घटना बताती है कि ये काफी आक्रामक नेचर के हैं. ये फ्लोरिडा के जंगल में मौजूद हिरणों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं. इससे वहां के जंगल के इकोसिस्टम को भी नुकसान हो सकता है.

पायथन के चंगुल में फंसा हिरण का बच्चा. Photo: Conservancy of Southwest Florida

कंज़रवेंसी ऑफ साउथ-वेस्ट फ्लोरिडा के बायोलॉजिस्टों ने पायथन की इस प्रजाति की संख्या बढ़ने से रोकने के लिए एक प्लान बनाया. वो जिस भी पायथन को पकड़ते, उसे मार्क कर देते. इससे होता ये था कि ब्रीडिंग वाले सीज़न में जब वो किसी दूसरे साथी के पास जाते, तो उनका दूसरा साथी भी पकड़ लिया जाता. उनका ये प्लान सक्सेसफुल रहा. इसकी वजह से उन्होंने अब तक सौ से भी ज़्यादा पायथनों को धर लिया है. वो इन्हें पकड़कर मौत के हवाले कर देते हैं. इसमें उनकी मदद फ्लोरिडा के दूसरे विभागों के लोग भी करते हैं.

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