आज महादेव के सावन का पहला दिन, क्या करें-क्या बिल्कुल ना करें

आज जुलाई महीने का अंतिम शनिवार है तो वहीं सावन के महीने का पहला दिन। हिंदू धर्म में सावन के महीने को बेहद पवित्र माना जाता है। साथ ही सावन भगवान शिव का प्रिय माह है। पूरे सावन भारत की भूमि शिवमय रहती है। इस महीने में शिव पूजा और सावन के सोमवार के व्रत का बहुत महत्व है। वहीं इस बार सावन की शुरुआत शनिवार से हुई है, ज्योतिषी इसे सुखद संयोग मान रहे हैं। जानें, शिव पूजा विधि और सावन का महत्व…

हर रोज चढ़ाएं जल
सावन में यदि आप शुभ तिथियों और सोमवार का व्रत नहीं कर पा रहे हैं तो प्रतिदिन शिवमंदिर में शिवलिंग पर जल अर्पित कर भोले का पूजन कर सकते हैं। हर रोज सुबह स्नान के बाद बस एक लोटा जल शिवलिंग पर चढ़ा दीजिए और भोले बाबा इतने से भी प्रसन्न हो जाएंगे।

क्या है सावन का महत्व?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन शिवजी का प्रिय महीना है। इसी दिन वह धरती पर प्रकट होकर अपनी ससुराल गए थे। जब शिवजी अपनी ससुराल पहुंचे तो वहां उनका स्वागत सेवल, अर्घ्य और अभिषेक से हुआ। जिससे शिवजी बहुत प्रसन्न हुए। तभी से शिवजी के अभिषेक की परंपरा चली आ रही है। धार्मिक आस्था है कि हर साल सावन के महीने में शिवजी पृथ्वी पर आते हैं। इसलिए इस महीने में शिवपूजा का विशेष महत्व है।

क्यों चढ़ाते हैं शिवजी पर जल?
धर्म शास्त्रों में समुंद्र मंथन का विवरण मिलता है। इसके अनुसार, समुद्र मंथन सावन के महीने में ही किया गया था। समुद्र मंथने के दौरान जो विष निकला, उससे संपूर्ण ब्रह्मांड के जीवों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा। इसलिए सभी के प्राणों की रक्षा हेतु शिवजी ने वह सारा विश पी लिया, जिस कारण उनका गला नीला पड़ गया। विश की गर्मी को शांत करने के लिए सभी देवताओं ने शिवजी को जल और दूध अर्पित किया। ताकि उन्हें राहत मिल सके। तभी से सावन में शिवजी पर जल और दूध चढ़ाने का विशेष महत्व माना गया है।

4 महीने शिवजी करेंगे सृष्टि का संचानल
धार्मिक कथाओं में भगवान विष्ण को सृष्टि का संचालक कहा गया है। लेकिन देवशनी एकादशी (23 जुलाई) से भगवान विष्णु चार महीने के लिए सो गए हैं। मान्यता है कि जब विष्णुजी सो जाते हैं, तब सृष्टि के संचालन का भार शिवजी अपने कंधों पर ले लेते हैं। ऐसे में भक्त अपने सभी संकटों से मुक्ति के लिए शिवजी के दर पर जाते हैं।

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