देवी माँ की कृपा ऐसे प्राप्त कर सकते हैं आप

पुराणों मे ऐसी मान्यता है, कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने मिलकर नवदुर्गा के रूप का सृजन किया था। नौ दिनों का यही महत्व है – दुर्गा के नौ रूपों की आराधना करना। इसलिए नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करने से त्रिमूर्ति की पूजा अपने आप ही हो जाती है। नवरात्रि पर देवी माँ नौ दिन अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। नवरात्र देवी पूजा का सबसे बड़ा उत्सव है। यह पर्व वर्ष में सिर्फ दो बार मनाया जाता है।

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है। इसके बाद नवरात्रि के नौ दिन मां के नौ स्वरूप की पूजा की जाती है। नौ दिन मां के अलग-अलग स्वरुप की पूजा की जाती है। नवरात्रि में देवी की उपासना, पूजा करने से आत्मशुद्धि के साथ-साथ घर की नेगेटिविटी भी दूर होती है। और हर तरफ वातावरण में साकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

माता की कृपा ऐसे प्राप्त करें:

दुर्गा सप्तसती के अन्दर कुंजिकास्तोत्र में भगवान शिव ने पार्वती को बताया है। कि जो व्यक्ति पूरी तरह से दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं पढ़ सकता है। वह केवल एक बार सिद्घ कुंजिकास्तोत्र का पाठ कर ले। इसके पाठ मात्र से कवच, अर्गलास्तोत्र सहित संपूर्ण दुर्गासप्तशती के पाठ का फल मिल जाता है। कुंजिका स्तोत्र सिद्घ मंत्रों द्वारा निर्मित किया गया है। जिसके हर शब्द प्रवावशाली हैं।

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