अगर पार्टनर करना चाहता है दूसरी शादी और आपने नहीं की अपील, तो मान्य होगी अबसे दूसरी शादी

सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि तलाक की डिक्री के खिलाफ अपील नहीं करने वाले दूसरी शादी करने के लिए स्वतंत्र हैं। इसमें हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 15 के प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। जस्टिस एस.ए. बोब्डे और एल. नागेश्वर राव की पीठ ने फैसले में स्पष्ट किया कि धारा 15 में दूसरी शादी पर लगाई गई बंदिशें तलाक होने के बाद अपीलों के खारिज होने तक ही हैं। ये रुकावटें पक्षों में समझौता होने की स्थिति में या अपील न करने वालों पर भी लागू नहीं होती।

तलाक के खिलाफ अपील वापस ले दूसरी शादी की

मामले में एक पुरुष ने एक महिला से शादी की लेकिन महिला ने फैमिली कोर्ट से तलाक हासिल कर लिया। इस फैसले के खिलाफ पुरुष हाईकोर्ट गया और अपील दायर की। इस अपील के लंबित रहते दोनों पक्षों में समझौता हो गया और दोनों ने अलग रहने का फैसला कर लिया। साथ ही पुरुष ने इस अपील को वापस लेने की अर्जी भी कोर्ट में दे दी। हाईकोर्ट ने अर्जी स्वीकार कर ली और तलाक के खिलाफ अपील खारिज कर दी। इस पर पुरुष ने एक अन्य महिला से 6 नवम्बर 2011 को शादी की लेकिन तब तक हाईकोर्ट ने उसकी अपील वापस लेने की अर्जी का निपटारा नहीं किया था। यह अर्जी 28 नवंबर की दी गई थी।

हाईकोर्ट ने दूसरा विवाह शून्य किया

अर्जी स्वीकार करने का हाईकोर्ट का यह आदेश 20 दिसंबर 2011 को आया। लेकिन दूसरी पत्नी फैमिली कोर्ट पहुंची और तलाक की मांग की। उसने कहा कि पुरुष की पहली शादी अस्तित्व में थी, क्योंकि उसकी शादी के दिन एक अर्जी हाईकोर्ट में लंबित थी। फैमिली कोर्ट ने यह अर्जी खारिज कर दी लेकिन हाईकोर्ट ने इसे सही माना और दूसरे विवाह को शून्य और व्यर्थ करार दे दिया। इस आदेश को पुरुष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

वापसी अर्जी की तारीख से अपील मान्य

पीठ ने कहा कि 28 नवंबर को अपील वापस लेने की अर्जी देने के दिन ही अपील को वापस लिया माना जाएगा। इस हिसाब से हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 15 के अनुसार पहली पत्नी के साथ उसका संबंध पूरी तरह से विच्छेद माना जाएगा, क्योंकि उनके बीच कोई अपिल लंबित नहीं है। इसलिए दूसरी शादी करने के समय पहली पत्नी का अस्तित्व नहीं माना जाएगा।

दो मुद्दे तय किए 

–  क्या अपील का खारिज होना अपील वापस लेने की तारीख से मान्य होगा?

–  विवाह पहली शादी के मामले में दायर अपील के लंबित रहने के कारण शून्य होगा?

दूसरा विवाह शून्य नहीं 

दूसरे मुद्दे पर कोर्ट ने कहा कि धारा 15 की कुछ शर्तों का उल्लंघन दूसरे विवाह को शून्य नहीं बनाता। यह सही है की तलाक के खिलाफ अपील वापस लेने की अर्जी पर फैसला नहीं हुआ था लेकिन तलाक तब तक तलाक है जब तक कोर्ट उसे डिक्री के जरिए पलट न दे। अन्यथा यह विवाह सभी उद्देश्यों के लिए अस्तित्व में नहीं होगा। अर्जी का लंबित रहना कोई असर नहीं डालेगा।

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