आशीर्वाद आटे में प्लास्टिक होने का दावा, एफआईआर दर्ज

खाद्य विशेषज्ञों के मुताबिक आटे में मिश्रित इस सफेद प्रोटीन को ग्लूटेन कहा जाता है। दरअसल यही ग्लूटेन आटे को बांधने का काम करता है। यदि यह न हो तो आटे की रोटी बनाना संभव नहीं है। आटे में यह खिंचाव इसी प्रोटीन की वजह से आता है।

एफएमसीजी कंपनी आईटीसी ने शुक्रवार को कहा कि वह ‘आशीर्वाद आटे’ में प्लास्टिक होने का दावा करने वाले वीडियो को लेकर देश कि राजधानी में एफआईआर दर्ज करवाएगी। यह पूरे देश में इस तरह के मामलों में तीसरी एफआईआर होगी। इससे पहले कंपनी कोलकाता और हैदराबार में एफआईआर दर्ज करवा चुकी है।

पीटीआई से बात करते हुए आईटीसी के क्षेत्रीय मुख्य कार्यकारी अधिकारी (खाद्य) हेमंत मलिक ने बताया, ‘हम आने वाले दिनों में दिल्ली में एक और एफआईआर दर्ज करवाने जा रहे हैं।’ उन्होंने आगे बताया कि यह साइबर जांच का मामला है और संबंधित राज्य सरकारें इस मामले की जांच कर रही हैं, कुछ नए नाम पता चले हैं जिसके लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

मलिक ने बताया कि जुलाई 2017 में आटे में प्लास्टिक होने का दावा करने वाला पहला वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ है और इसे पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में एक स्थानीय टीवी चैनल ने भी दिखाया लेकिन बाद में उन्होंने इसे हटा लिया। बाद में देश के अन्य हिस्सों में भी इस तरह के वीडियो टीवी पर दिखाई दिए। इसके बाद हमने बेंगलुरु में सिटी सिविल कोर्ट का रूख किया और इस तरह के वीडियो को प्रसारित करने पर रोक लगाने की मांग की।
इससे पहले दैनिक जागरण से बातचीत में भी हेमंत ने कहा था कि वीडियो में जिस तत्व को प्लास्टिक बताया जा रहा है वह दरअसल सफेद प्रोटीन है जिसे आटे में मिलाने के लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंड‌र्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआइ) के मानकों के मुताबिक मिलाया जाता है। रेगुलेटर के मुताबिक आटे में न्यूनतम छह फीसद ग्लूटेन मिलाना आवश्यक है। जिस तरह के वीडियो आशीर्वाद आटे को लेकर सोशल मीडिया में चल रहे हैं, अदालत ने भी ऐसे वीडियो को चलाने पर रोक लगायी है।

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