स्वर कोकिला लता मंगेश्कर ने पाकिस्तानी सिंगर आतिफ असलम को डांटा

भारतरत्न लता मंगेशकर हमेशा से ही पुराने गानों के रीमेक के खिलाफ रही हैं। एक पुराने गानें के रीमेक को लेकर एक बार फिर लता दीदी का गुस्सा सामने आया है। इस बार उनका गुस्सा पाकिस्तानी सिंगर आतिफ असलम के गाने चलते-चलते को लेकर है।

जैकी भगनानी और कृतिका कामरान स्टारर फिल्म ‘मित्रों’ में मीना कुमारी स्टारर फिल्म ‘पाकीजा’ का गाना ‘चलते चलते’ को रीमेक किया गया है। इस गाने को लता मंगेशकर ने गाया था। जब लता दीदी से इस नए गाने को लेकर पूछा गया कि आतिफ असलम की आवाज में उन्हें यह गाना कैसा लगा तो लता दीदी को गुस्सा आ गया।

लता दीदी ने कहा कि न तो उन्होंने यह गाना अब तक सुना है और न ही सुनना चाहती हैं। आजकल जो पुराने गानों को फिर से बनाने का रिवाज है उससे वह बेहद दुःखी हो जाती हैं। दीदी सवाल करती हुए कहती हैं, ‘आजकल जो गानें रीमिक्स किए जा रहे हैं, उनमें सादगी कहां है? कलाकारी कहां है? गाने को रीमिक्स बनाने के दौरान उसका संगीत और गीत किसकी सहमति से बदला जाता है?’

लताजी आगे कहती हैं, ‘गाने को बनाने वाले ऑरिजिनल कंपोजर और गीतकारों ने जो भी लिखा और बनाया था, वह उनकी अपनी कलाकारी थी। किसी को अधिकार नहीं कि उनकी कलाकारी को बदले।’

रीमिक्स से दुःखी लता मंगेशकर ने हाल ही में एक खुला खत लिखा था। लताजी ने लिखा, ‘कुछ समय से मैं देख रही हूं कि स्वर्णिम युग से जुड़े गीतों को नए ढंग से रीमिक्स कर पुनः पेश किया जा रहा है। कहते हैं कि यह गीत युवा श्रोताओं में लोकप्रिय हो रहे हैं। सच पूछिए तो इसमें आपत्ती की कोई बात नहीं है। गीत का मूल स्वरूप कायम रख, उसे नए परिवेश में पेश करना अच्छी बात है। एक कलाकार के नाते मैं भी यह मानती हूं कि कई गीत और कई धुनें ऐसी होती हैं, जिसे सुनकर हर कलाकार को लगता है कि काश इस गीत को गाने का मौका हमें मि लता। ऐसा लगना भी स्वाभाविक है, परंतु, गीत को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करना सरासर गलत है। सुना है कि ऐसा आजकल खूब हो रहा है और इन गीतों के मूल रचनाकार के बदले किसी नए का नाम दिया जाता है, जो अत्यंत अयोग्य है।

वह आगे लिखती हैं, ‘गाने की मूल धुन को बिगाड़ना, शब्दों में मनचाहा परिवर्तन करना या फिर नए और सस्ते शब्द जोड़ना इस तरह की बेतुकी हरकतें देख और सुन कर सचमुच मुझे बेहद पीड़ा होती है। किसी गीत को उसके मूल स्वरूप में पेश करना अच्छी बात है। ऐसा करने से मूल गीत की सुंदरता और उसका अर्थ कायम रहेगा। नई पीढ़ी को ऐसे गीत जरूर पसंद आएंगे।’

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