अभी-अभी : त्रि‍पुरा में सरकार बनाते ही बुरी तरह फंस गई बीजेपी, मोदी-शाह के उड़े होश

त्रिपुरा में 25 सालों बाद बीजेपी ने सरकार बना ली। यहां मनिक सरकार में बीजेपी ने ढाई दशकों का किला ढहा दिया। त्रिपुरा में भाजपा शून्य से शिखर तक पहुंच गई है। यहां 60 सदस्यीय विधानसभा सीटों में से 59 पर मतगणना हुई थी, जिसमें बीजेपी+ ने 43 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, लेफ्ट को केवल 16 सीटें ही मिली। वहीं, कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली। यहां 18 फरवरी को चुनाव हुए थे। लेकिन सरकार बनाते ही बीजेपी के सामने एक मुसीबत आ गई है।

त्रिपुरा में भाजपा

आदिवासियों के लिए अलग राज्य की मांग रख दी

बीजेपी की सहयोगी पार्टी इंडिजीनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) ने राज्य के आदिवासियों के लिए अलग राज्य की मांग रख दी है। आईपीएफटी के अध्यक्ष एन सी देबबर्मा ने कहा कि हमें उम्मीद है कि केंद्र सरकार हमारी इस मांग को जल्द पूरा करेगी। वहीं, दूसरी तरफ आईपीएफटी ने राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर दी है। ऐसे में जब बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बि‍प्लब देब का सीएम बनना तय माना जा रहा है, यह भारी जीत हासिल कर चुके गठबंधन के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।

आईपीएफटी के अध्यक्ष ने क्या कहा

आईपीएफटी के अध्यक्ष एनसी देबबर्मा ने अपनी सहयोगी पार्टी की जानकारी के बिना प्रेस क्लब में एक बैठक की और आदीवासी सीएम बनाने की मांग की। देबबर्मा ने कहा- चुनाव के नतीजों में भाजपा और आईपीएफटी गठबंधन को भारी बहुमत मिला है लेकिन यह आदिवासी वोटों के बिना संभव नहीं हो पाता। हम आरक्षित एसटी विधानसभा क्षेत्रों में जीत की वजह से ही यह चुनाव जीत पाए हैं।

बीजेपी के त्रिपुरा प्रभारी ने क्या कहा

वहीं, इसपर बीजेपी के त्रिपुरा प्रभारी सुनील देवधर ने कहा कि उन्हें देबबर्मा के बयान की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, उन्होंने अपना विचार दिया है। हम सोमवार सुबह को आईपीएफटी नेताओं से मिलेंगे और इसके बाद ही इस पर कुछ विचार किया जा सकता है। त्रिपुरा में बीजेपी और आईपीएफटी गठबंधन को 59 सीटों में से 43 सीटों पर जीत मिली। बीजेपी की झोली में 35 सीटें आईं जबकि आईपीएफटी आठ सीटों पर कब्जा जमाने में कामयाब रही।

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