उत्तर प्रदेश में एक करोड़ रु का छात्रवृत्ति घोटाला, एक्शन में आई योगी सरकार

उत्तर प्रदेश के इटावा और मेरठ में केवल कागज पर बने स्कूलों ने छात्रवृत्ति के एक करोड़ रुपये निगल लिए हैं। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने बताया कि इटावा में 118 स्कूलों की जांच में 87 जमीन पर नहीं पाए गए। साथ ही, 31 स्कूलों ने कागज पर छात्रों की संख्या अधिक बताई है। आर्थिक अपराध शाखा के महानिदेशक (डीजी) राजेंद्र पाल सिंह ने बताया कि मेरठ में 20 स्कूलों की जांच की जा रही है। उनका कहना है कि इनके अलावा और भी स्कूल जांच के दायरे में हैं। बताया जाता है कि इन मामलों में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों की संख्या अधिक है।

इस मामले में सरकार ने 95 स्कूलों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मंजूरी दे दी है, लेकिन जांच में ईओओ द्वारा आठ स्कूलों के कामकाज में कोई विसंगतियां नहीं मिलीं। ईओओ के महानिदेशक राजेंद्र पाल सिंह ने कहा, “इटावा में 70% स्कूल मौजूद नहीं थे, क्योंकि मेरठ जिले में 20 से अधिक ऐसे स्कूलों का पता चला था।” इटावा की जांच ईओओ की कानपुर इकाई द्वारा आयोजित की जा रही है, जबकि मेरठ कार्यालय मेरठ में घोटाले की जांच कर रहा है। कानपुर में एक वरिष्ठ ईओओ अधिकारी ने कहा कि एक वर्ष में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का इजाफा हुआ था। छात्रवृत्ति निधि का सफाया 2008 में शुरू हुआ और 200 9 तक जारी रहा। ज्यादातर जूनियर और प्राथमिक विद्यालय धोखाधड़ी में शामिल थे।

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