यहां मनौती के लिए श्रद्धालु गोबर से उल्‍टा स्वास्तिक बनाते हैं,पूर्ण होने पर….

यहां मनौती के लिए श्रद्धालु गोबर से उल्‍टा स्वास्तिक बनाते हैं जब मन्नत पूर्ण हो जाती है तो वे पुन: मंदिर में आकर सीधा स्वास्तिक बनाते हैं।

नवरात्रि में घट स्‍थापना के बाद से यहां पर नारियल नहीं फोड़ा जाता, अष्‍टमी के बाद ही यहां नारियल फोड़ा जाता है….

ऐसी मान्‍यता है कि उज्‍जैन के राजा विक्रमादित्‍य के समय उनके भानजे विजयसिंह का यहां पर शासन था। विजयसिंह वे रोज स्‍नान के बाद अपने घोड़े पर बैठकर उज्‍जैन स्‍थित मां हरसिद्धि के मंदिर में दर्शन के लिए जाते थे।

एक दिन मां हरसिद्धि ने राजा को सपने में दर्शन दिए और राजा से बीजानगरी में ही मंदिर बनवाने और उस मंदिर का दरवाजा पूर्व दिशा में रखने का कहा। राजा ने वैसा ही किया।

 

उसके बाद माताजी फिर राजा के सपने में आईं और कहा कि वो मंदिर में विराजमान हो गई हैं और तुमने मंदिर का दरवाजा पूर्व में रखा था, पर अब वह पश्चिम में हो गया है। राजा ने देखा तो उनके आश्चर्य की सीमा नहीं रही, क्‍योंकि मंदिर का द्वार वाकई पश्चिम में हो गया था।

 

Facebook Comments