अलागिरी और स्टालिन क्या साथ आएंगे?

दिवंगत करुणानिधि के बड़े बेटे एमके अलागिरी की रैली फ्लॉप हो गई। तमिलनाडु की राजनीति के जानकारों का कहना है कि अलागिरी ने बड़ी रणनीतिक गलती की। उनको चेन्नई की बजाय मदुरै में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहिए था। डीएमके से निकाले जाने के बाद भी मदुरै में उनकी अच्छी पकड़ है। वहां डीएमके से ज्यादा उनके अपने समर्थक हैं।

सो, अगर वे वहां रैली करते तो उसका बड़ा संदेश चेन्नई पहुंचता। पर उन्होंने चेन्नई में अपने पिता की समाधि तक मार्च का आयोजन किया, जिसमें बहुत कम लोग जुटे। इससे डीएमके के नेतृत्व पर उनका दावा टांय टांय फिस्स हो गया।
गौरतलब है कि करुणानिधि के निधन के बाद अलागिरी ने पार्टी के नेतृत्व पर दावा किया था। लेकिन इसके बावजूद उनके छोटे भाई एमके स्टालिन को आराम से पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया गया। अब अलागिरी के पास कोई रास्ता नहीं बच रहा है। कहा जा रहा है कि अब नेता के तौर पर नहीं, बल्कि सामान्य कार्यकर्ता की हैसियत से पार्टी में उनकी वापसी हो सकती है।

यह भी संभव है कि पहले की तरह उनको मदुरै का प्रभार मिल जाए, जहां के वे एकछत्र नेता हैं। जानकार सूत्रों के मुताबिक परिवार के दूसरे सदस्य और रिश्तेदार इस कोशिश में लगे हैं कि दोनों भाइयों में तालमेल कराया जाए। अलागिरी भी हवा का रुख भांप रहे हैं। उनको लग रहा है कि अगले चुनाव में डीएमके की वापसी होनी है। इसलिए वे भी समझौता कर सकते हैं।

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