99% लोग नहीं जानते होंगे की भगवान शिव के अलावा यह भी है, श्री गणेश जी के पिता

गणेश भगवान के पिता भगवान शिव है, यह सभी को पता है और माता पर्व पार्वती उनकी मां है। लेकिन यह बात कोई नहीं जानता कि उनके एक और पिता है। आज तक आपने भी इसके बारे में नहीं सुना होगा। तो हम आपको आज यही बताने जा रहे है। इसके पीछे एक कथा है जिससे आप अब तक अनजान होंगे। तो आइए जानते है उस कथा के बारे में

देवराज इंद्र और स्वर्ग के सभी देवता सिंदूरा देत्या के अत्याचार से परेशान थे। ऐसे में उन्होंने ब्रह्माजी से मदद मांगी तो उन्होंने गणेश जी के पास जाने को कहा। सभी ने गणेश जी से प्रार्थना की कि वह देत्या सिंदूरा के अत्याचार से मुक्ति मुक्ति दिलाए। इसी आराधना से खुश होकर गणेश जी ने पार्वती जी के घर गजानंद रूप में अवतार लिया। वही राजा वरेण्य की पत्नी पुष्पिका के घर भी एक बालक ने जन्म लिया। लेकिन जब उन्हें प्रसव पीड़ा हुई तो रानी मूर्छित हो गई और उनके पुत्र को राक्षसी उठा ले गए।

यही देखते हुए भगवान शिव के गणो ने गजानन को रानी पुष्पिका के पास पहुंचा दिया। क्योंकि राजा वरेण्यं की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि वह उनके यहां पुत्र रूप में जन्म लेंगे। और जब यह सुचना और राजा वरेण्यं को मिली तो उसने इसे अशुभ माना और गणेश जी को जंगल में छोड़ा आये। जंगल से महर्षि पराशर उस बालक को घर ले आए और पत्नी वत्सला और पराशर ऋषि ने गणपति का पालन पोषण किया। इसी बीच राजा वरेण्यं को इस बात का पता चला कि वह बालक गणेश जी थे, जिसके बाद उन्होंने भगवान गणेश से अपने अपराध की क्षमा मांगी और गणेश जी ने उन्हें क्षमा कर दिया। साथ ही अपने पूर्व जन्म के वरदान का स्मरण करवाया। इसके बाद भगवान गणेश ने अपने पिता वरेण्यं से अपने स्वधाम यात्रा की आज्ञा मांगी। इसके बाद राजा वरेण्य को भगवान गणेश ने ज्ञान उपदेश दिया जिसे गणेश गीता कहा जाता है।

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