अमावस की काली रात, 10 बजे के बाद भूलकर भी ना करें ये काम वरना अगली सुबह नहीं देख पाएंगे

 वैशाख मास की अमावस्या सोमवार को होने से सोमवती अमावस्या हो गई है। सोमवार को अमावस्या का संयोग साल में 2-3 बार बन जाता है, लेकिन देव नक्षत्र अश्विनी के साथ पवित्र वैशाख मास में ये संयोग बहुत ही कम बन पता है। इसलिए ये अमावस्या पितृदोष और कालसर्प दोष निवारण के लिए बहुत ही खास हो गई है।

 

बहुत से लोगों को पता नहीं होता कि अमावस्या पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं। इस वजह से लोग जाने अनजाने में एेसे काम भी कर देते हैं जिससे उन्हे दोष लगता है। वहीं कुछ ऐसे छोटे-छोटे उपाय भी होते हैं जिनको करने से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। जानिए इस सोमवती अमावस्या पर पितृदोष और कालसर्प दोष निवारण के उपाय और साथ ही जानें क्या करें और क्या न करें।

 

क्या करें –

सोमवती अमावस्या पर धान, पान, हल्दी, सिन्दूर और सुपारी से पीपल के पेड़ की पूजा और परिक्रमा की जाती है। हर परिक्रमा पर इनमें से कोई भी एक चीज चढ़ाएं। उसके बाद अपने सामर्थ्य यानी जितना दान आप दे सकें उस हिसाब से फल, मिठाई, खाने की चीजें या सुहाग सामग्री किसी मंदिर के पुजारी या गरीब ब्रह्मण को दान दें।

इसके अलावा अन्य लोग सुबह जल्दी उठकर शिवजी को जल चढ़ाएं। गरीबों को खाने की चीजें दान दें। पितृओं की पूजा करें। पितृओं के लिए ब्राह्मण या किसी मंदिर के पुजारी को भोजन करवाएं। गाय, कुत्ते और कौवों को रोटी खिलाएं।

क्या न करें –

– इस अमावस्या पर शराब और मांस से दूर रहें।

– शारीरिक संबंध न बनाएं।

– किसी का झूठा भोजन न करें।

– बिना नहाए न रहें।

– शेव, हेयर और नेल कटींग न करें।

– दोपहर में न सोएं।

– लहसुन-प्याज जैसी तामसिक चीजें भी न खाएं।

कैसे करें पितृ दोष और कालसर्प दोष की शांति –

– सोमवती अमावस्या पर सूर्य उदय होने के पहले यानी ब्रह्म मुहूर्त में पीपल के पेड़ पर जल और कच्चा दूध चढ़ाने से पितृदोष की शांति होती है।

– सूर्योदय के समय किसी भी पवित्र नदी में कच्चा दूध और पानी मिलाकर बहाएं, इससे पितृदोष में शांति मिलती है।

– चांदी के नाग-नागिन बनवा कर उनकी पूजा करें। पूजा करने के बाद शिवलिंग या किसी भी पवित्र नदी में बहा देने से कालसर्प दोष में शांति मिलती है।

 

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