आंध्रप्रदेश को क्यों चाहिए विशेष राज्य का दर्जा?

 आंध्र को विशेष विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलने से नाराज टीडीपी के दो मंत्रियों ने थोड़ी देर पहले मोदी सरकार से इस्तीफा दे दिया है। शाम 6 बजे के करीब टीडीपी के दोनों मंत्री प्रधानमंत्री आवास पहुंचे और अपना इस्तीफा सौंप दिया। मोदी सरकार में टीडीपी के दोनों मंत्री अशोक गजपति राजू और वाईएस चौधरी ने 15 मिनट तक प्रधानमंत्री से अपनी मुलाकात की और इस्तीफा सौंप दिया।

टीडीपी और बीजेपी में झगड़े की जड़ विशेष राज्य का दर्जा है। टीडीपी चाहती है आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा मिले। सरकार कहती है ये संभव नहीं है।

आंध्रप्रदेश क्यों कहता है कि उसे विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए…

– आंध्रप्रदेश के बंटवारे का बाद राज्य की आमदनी वाले ज्यादातर इलाके तेलंगाना में चले गए।
– नए आंध्रप्रदेश में गरीबी और लोगों की प्रति व्यक्ति आय कम है।
– आर्थिक रुप से कमजोर हो गया है, विकास की रफ्तार में पीछे छूट गया है।

किन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा देने का प्रावधान है वो समझिए…

– संविधान में विशेष राज्य के दर्जे का प्रावधान नहीं, लेकिन पहाड़ी, दुर्गम, कम जनसंख्या घनत्व, आदिवासी बहुल, पिछड़े, प्रति व्यक्ति आय और इंटरनेशनल बॉर्डर से जुड़े राज्यो को विशेष राज्य का दर्जा मिलता रहा है।

अब तक देश के 11 राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिला है।

अरुणाचल प्रदेश
असम
मणिपुर
मेघालय
मिजोरम
नागालैंड
सिक्किम
त्रिपुरा
जम्मू-कश्मीर
हिमाचल प्रदेश
उत्तराखंड

बिहार भी विशेष राज्य के दर्जे की मांग करता रहा है, लेकिन उसे भी ये दर्जा हासिल नहीं है।

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