दक्षिण भारत में भगवान कृष्ण के कई अनोखे और सुंदर मंदिर है, जिनमें से एक है उडुपी का कृष्ण मंदिर

दक्षिण भारत में भगवान कृष्ण के कई अनोखे और सुंदर मंदिर है, जिनमें से एक है उडुपी का कृष्ण मंदिर (Karnatakas Udupi Krishna Temple)। उडुपी कर्नाटक का एक गांव है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर में अपने भक्त को दर्शन देने के लिए भगवान कृष्ण खुद ही मंदिर की खिड़की तक चले गए थे।

इस मंदिर के निर्माण के पीछे एक कथा प्रसिद्ध है। कथा के अनुसार, एक बार यहां भयंकर समुद्री तूफान आया। उसी दौरान संत माधवाचार्य समुद्र के किनारे खड़े थे। उन्होंने देखा कि एक जहाज समुद्र के बीच में फंस गया है। यह देखकर वे अपनी शक्तियों से जहाज को सुरक्षित किनारे तक ले आए।

जहाज पर सवार लोगों ने संत को धन्यवाद कहते हुए, भेंट के रूप में भगवान कृष्ण और बलराम की दो मूर्तियों दी। संत ने भगवान कृष्ण की मूर्ति को उडुपी में और भगवान बलराम की मूर्ति को यहां से 5 कि.मी. दूर मालपी नाम की जगह पर स्थापित कर दिया। मालपी के बलराम मंदिर को वदंबेदेश्वरा मंदिर और उडुपी के कृष्ण मंदिर को कृष्ण मठ कहा जाता है।

कहा जाता है कि एक बार यहां पर भगवान कृष्ण के दर्शन करने के लिए कनकदास नाम का एक भक्त आया। ब्राह्मण न होने की वजह से उसे मंदिर में प्रवेश करने की आज्ञा नहीं दी गई। उदास होकर कमकदास मंदिर की खिड़की के पास जा खड़ा हुआ और वहीं से भगवान के दर्शन करने की कोशिश करने लगा। उसकी भक्ति देखकर भगवान कृष्ण की मूर्ति खुद ही चलकर मंदिर की खिड़की के पास आ गई और कनकदास को दर्शन दिए।

karnatakas udupi krishna temple

इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर में अपने भक्त को दर्शन देने के लिए भगवान कृष्ण खुद ही मंदिर की खिड़की तक चले गए थे।

उस दिन से लेकर आज तक भगवान कृष्ण की मूर्ति मंदिर में पीछे की ओर देखते हुई ही स्थापित है। जिस खिड़की के पास यह मूर्ति स्थापित है, उसे कनकाना किंदी के नाम से जाना जाता है। कनकाना किंदी खिड़की को मीनाकारी से सजाया गया है। इस खिड़की में 9 छोटे-छोटे छेद हैं, जिनमें से अंदर झांकने पर भगवान कृष्ण के दर्शन होते हैं।

यहां पर भगवान कृष्ण की युवावस्था की एक सुंदर मूर्ति है, जिसमें वे अपने दाएं हाथ में एक मथानी और बाएं हाथ में रस्सी पकड़े हुए हैं। यहां की कृष्ण मूर्ति का स्वरूप बहुत ही सुदंर और मनमोहक है।

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