कैसे अनसुनी रह गई मिसेज कौल और अटल की प्रेम कहानी, गोद लेकर बेटियों की शादी भी करवाई

भारत के राजनीतिक इतिहास में पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी का निधन हो गया है। अटल का संपूर्ण व्यक्तित्व शिखर पुरुष के रूप में दर्ज है। 16 अगस्त 2018 को अटल जी ने अंतिम सासं ली और दुनिया को अलविदा कह दिया। पूरा देश उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दे रहा है।

उनकी पहचान एक कुशल राजनीतिज्ञ, प्रशासक, भाषाविद, कवि, पत्रकार और लेखक के रूप में रही है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा में अटल राजनीति का एक बड़ा चेहरा रहे थे। नेहरू जी ने युवा अटल का भाषण सुनकर कह दिया था यह भारत का भावी प्रधानमंत्री बोल रहा है। अटल जी प्रधानमंत्री तीन बार प्रधानमंत्री बने। उन्होंने जवाहर लाल जी और इंदिरा जी के रिकॉर्ड को भी तोड़ा। भारत में ऐसा कोई प्रधानमंत्री नहीं हुआ, शायद कोई हो, जो तीन बार प्रधानमंत्री बने।

देशभर में अधिकतर नेताओं की पर्सनल लाइफ पर बातें होती हैं। पर अटल जी का ‘चरित्र’ सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा रहा था। उनके चरित्र पर कोई धब्बा नहीं है। उसके बावजूद उन्होंने अशोक सिंहल जी के डांटने पर एक बार संसद में कहा था, “मैं कुंआरा तो हूं, ब्रह्मचारी नहीं।” राजनीतिक सेवा का व्रत लेने के कारण वे आजीवन कुंवारे रहे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लिए आजीवन अविवाहित रहने का फैसला लिया था। हालांकि उनकी प्रेम कहानी हमेशा गुमनामी में नहीं बल्कि सबकी नजरों में चर्चा में रही। मिसेज कौल के साथ उनके संबंध किसी से छिपे नहीं थे।

विश्व में किसी राजनेता का ऐसा नैतिक साहस है कि किसी से उनके क्या संबंध हैं, आध्यात्मिक संबंध, प्रेम संबंध या भावनात्मक संबंध, वे सब जग जाहिर है। बिना विवाह किए उन्होंने मिसेज कौल से अपने संबंधों को स्वीकारा था। ये बात ओर है कि दोनों ने हमेशा इस पर चुप्पी साधे रखी और मीडिया ने भी इस सावल को कभी मुद्दा नहीं बनाया। कॉलेज के समय से वह एक लड़की को बेहद पसंद करते थे। जो उनके साथ पढ़ती थी। यह थीं शीला कौल। आप इसे मित्रता कहे, प्रेम संबंध कहें या आज के दौर का लिव इन रिलेशन कहें, लेकिन अटल जो करते थे खुलकर करते, वही करते जो उन्हें उचित लगता। उन्होंने बिना शादी किए अपने प्रेम संबंधों को छिपाया नहीं था। ऐसा भी कहा जाता है कि उनकी बहुत सी प्रेमिकाएं थीं हालांकि उनके साथ नाम बस मिसेज कौल का ही जुड़ा।

प्रेम कहानी की शुरुआत 40 के दशक में होती है, जब अटल ग्वालियर के एक कॉलेज में पढ़ रहे थे। वह भी उनके साथ पढ़ रही थीं। दौर ऐसा था कि बातें केवल आंखों ही आंखों में होती थीं या मूक जुबान बहुत प्रेम के संकेत देती थी। ज्यादा बात करने के अवसर नहीं थे, आखिरकार अटल ने इस राह पर कदम बढ़ाने की हिम्मत की उन्होंने लवलेटर लिखा. जवाब ही नहीं आया। वह बहुत निराश हुए। कहा भी जाता है कि शीला कौल ने जवाब दिया था लेकिन वह अटल तक नहीं पहुंचा। पर उन्हें क्या मालूम था कि ये लवलेटर करीब एक-डेढ़ दशक बाद उनकी जिंदगी में हमेशा के लिए बदलने वाला है।

वो ऐसे दिन थे जब लड़के और लड़कियों की दोस्ती को अच्छी निगाह से नहीं देखा जाता था। इसलिए प्यार होने पर भी लोग भावनाओं का इजहार नहीं कर पाते थे। इसके बाद भी युवा अटल ने लाइब्रेरी में एक किताब के अंदर राजकुमारी के लिए एक लेटर रखा लेकिन उन्हें उस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला, वास्तव में राजकुमारी ने जवाब किताब के अंदर ही रखकर अटल के लिए दिया गया था लेकिन वह उन तक नहीं पहुंच सका। इस बीच राजकुमारी के अधिकारी पिता ने उनकी शादी एक युवा कॉलेज टीचर ब्रिज नारायण कौल से कर दी थी। किताब में राजकुमारी कौल के एक परिवारिक करीबी के हवाले से कहा गया कि वास्तव में वह अटल से शादी करना चाहती थीं, लेकिन घर में इसका जबरदस्त विरोध हुआ। हालांकि अटल ब्राह्मण थे लेकिन कौल अपने को कहीं बेहतर कुल का मानते थे। इसलिए शादी नहीं हो सकी।

जब मिसेज कौल के हज्बंड की मौत हो गई तो वाजपेयी ने उनके परिवार को अपना लिया था। वह मिसेज कौल की बेटी नमिता को अपनी बेटी मानते थे, लेकिन उन्होंने मिसेज कौल के साथ अपने रिश्ते को कभी कोई नाम नहीं दिया। कई तरह की अफवाहें भी फैलती रहीं, लेकिन दोनों ने इस रिश्ते कोई नाम देने की जरूरत नहीं समझी।

मिसेज कौल के निधन पर राजकुमारी कौल को अटल की दत्तक पुत्री नमिता की मां कहकर संबोधित किया गया। वास्तविकता ये है कि जब अटल ने कौल के साथ रहना शुरू किया तो उन्होंने परिवार की दोनों बेटियों नमिता और नम्रता को गोद ले लिया था। मिसेज कौल हमेशा अटल जी के साथ रहीं और अटल जी ने उनकी बेटियों की शादियां भी की। हालांकि, दोनों ने अपने रिश्ते को कभी कोई नाम नहीं दिया। पर लोगों के अनुसार ये खूबसूरत प्रेम कहानी थी। राजकुमारी कौल को दिल्ली के राजनीतिक हलकों में लोग मिसेज कौल के नाम से जानते थे। हर किसी को मालूम था कि वो अटलजी के लिए सबसे प्रिय हैं।

बेटियों के साथ अटल विहारी वाजपेयी…

मई 2014 में जब मिसेज कौल का निधन हुआ तो अखबारों में पहली बार उनके बारे में खबरें छपीं, जिसे पढ़कर पाठकों ने जाना कि वह अटल जी की जीवन की डोर थीं, उनके घर की सबसे महत्वपूर्ण सदस्य और उनकी सबसे घनिष्ठ भी। पत्रकार कुलदीप नैयर ने टेलीग्राफ में लिखा, ‘संकोची मिसेज कौल अटल की सबकुछ थीं, जिस तरह उन्होंने उनकी सेवा की, वह शायद कोई कर पाए, वह हमेशा उनके साथ रहीं, जब तक उनका हार्ट अटैक से निधन नहीं हो गया।’ 5 मई  साल 2014 में  मिसेज कौल दुनिया को विदा कह गईं तब वाजपेयी खराब सेहत की वजह से उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए थे।

अटल जी के बीमार होने पर तब एक मात्र शीला जी रही जो सुख दुख में उनके साथ खड़ी थी। किसी ने इसे देखा नहीं। हिंदुस्तान के किसी राजनीतिज्ञ ने, प्रेस ने इस विषय को उठाया भी नहीं, कि प्रधानमंत्री आवास में एक महिला भी रहती है। हालांकि अटल ने नेताओं के बयान सहे जो उनकी पर्सनल लाइफ पर कटाक्ष थे। राजनेता सुब्रमण्यम स्वामी ने अटल जी के निजी जीवन पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि वह उस उम्र में हनीमून मना रहे हैं।

‘ऊषा सिंहल’ जो अशोक सिंहल जी की इकलौती बहन थीं। वह अटल जी को भाई मानती थीं, वह कहती थीं ‘ये सात भैया एक तरफ और राज भैया तरफ’। ऊषा सिंहल अटल जी को भी राखी बांधती थीं। उन्हें पतरकु (दुबले पतले वाले) भैया कहती रहीं। ऊषा सिंहल ने एक बार अटल वाजपेयी से पूछा कि ‘क्या शीला जी भी यहीं रहती है भैया!’ तो अटल जी शर्माने लगे और कहने लगे- ‘हां, यहीं रहती है ऊषा बहिन’।

लेकिन ये विश्व के इतिहास की एक अनोखी घटना है। क्या कोई ऐसी और घटना बता सकता है, जहां प्रधानमंत्री के घर में एक अनजान महिला जो उनकी पत्नी नहीं हो। उसके बाद भी अपने दत्तक दामाद के साथ वहीं रहती हो। उनके बारे में वही लोग जानते थे, जो अटल जी की प्राइवेट लाइफ के बारे में जानते थे। उनके निधन के साथ ही अटल जी की लव स्टोरी का अंत हो गया था। अटल जब प्रधानमंत्री बने तो कई महत्वपूर्ण पोजिशंस पर उन्हें रखवाने में मिसेज कौल ने अहम भूमिका निभाई थी।

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