हो जाएँ सावधान,ऐंटीबायॉटिक दवाओ से हर साल 7 लाख लोगों की मौत….

जारी किए गए लेटर में दवाओं से पड़ने वाले बुरे असर के बारे में बताया गया है।लेटर में कहा गया है कि बीमारी के बोझ, खराब सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे, बढ़ती आय और सस्ती ऐंटीबायॉटिक दवाओं की अनियमित बिक्री जैसे कारकों ने भारत में एंटीबायॉटिक प्रतिरोध के संकट को बढ़ा दिया है।
एटना इंटरनेशनल ने अपने श्वेत पत्र ऐंटीबायॉटिक प्रतिरोध में दवाओं से पड़ने वाले बुरे असर के बारे में बताया है।
बताया गया है कि AMR से दुनियाभर में हर साल करीब सात लाख लोगों की मौत हो रही है और 2050 तक यह आंकड़ा एक करोड़ तक पहुंच सकता है।

बढ़ती मौतों की बेतहाशा वजह के पीछे ऐंटीबायॉटिक दवाओं का अनियंत्रित इस्तेमाल बताया गया है। लेटर में कहा गया है कि जितनी तेजी से दुनिया का मेडिकल सेक्टर विकसित हो रहा है उतनी ही तेजी से ऐंटीबायॉटिक दवाओं का इस्तेमाल लोगों में बढ़ता जा रहा है।

दुनियाभर में ऐंटीबायॉटिक प्रतिरोध के प्रति बढ़ती चिंता पर डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर भारतीय सोचते हैं कि ऐंटीबायॉटिक दवाएं सामान्य सर्दी और गैस्ट्रोएन्टेरिटिस जैसी बीमारियों का इलाज कर सकती हैं, जो कि बिल्कुल गलत है।

डॉक्टरों का कहना है कि इन संक्रमणों में से ज्यादातर वायरस के कारण होते हैं, और ऐंटीबायॉटिक दवाइयों की उनके इलाज में कोई भूमिका नहीं होती है। भारत दुनिया में ऐंटीबायॉटिक दवाओं के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है। इस मुद्दे पर एटना इंडिया के प्रबंध निदेशक मानसीज मिश्रा ने कहा, ‘ऐंटीबायॉटिक प्रतिरोध एक संकट है जो विश्व स्तर पर सभी को प्रभावित करता है।

जानकारी के मुताबिक, ऐंटीबायॉटिक दवाओं से होने वाली मौत के आंकड़ों में यूरोप सहित अमेरिका भी शामिल है। रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक इन दवाओं की बिक्री दुनिया के 76 गरीब देशों में तेजी से हो रही है।

 

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