यूपी : बच्ची पैदा होने के बाद महिला को अस्पताल से निकाला, मौत

बच्ची को जन्म देने के बाद गरीबी से मजबूर मां दुनिया से विदा हो गई। अस्पताल में दो दिन रखने के निर्देश होने के बाद भी महिला को बच्ची के साथ निकाल दिया गया। घर लौटी मां बच्ची के साथ खुले आसमां तले सोई। लेकिन सुबह उठ न सकी। उसने दम तोड़ दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पूरा गांव शोक में डूब गया। बेबश पति के पास अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे। ग्रामीणों ने चंदा एकत्रित किया और मां का अंतिम संस्कार कराया। घटना को लेकर ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति गुस्सा है।

मामला किशनी थाना क्षेत्र के ग्राम मनिगांव के मजरा जगतपुर का है। यहां के निवासी राजेश जोशी पुत्र श्रीपाल जोशी का तीन दिन पूर्व बरसात में मकान गिर गया। पूरा परिवार पॉलिथीन के नीचे रह रहा है। गुरुवार को उसकी 30 वर्षीय पत्नी प्रियंका को प्रसव पीड़ा हुई तो राजेश ने एंबुलेंस 108 पर कई बार कॉल किया, लेकिन फोन नहीं उठा। फिर मजबूर पति किराए के वाहन में प्रियंका को किशनी सीएचसी पर ले जाया गया। जहां शुक्रवार की सुबह प्रियंका ने एक बेटी को जन्म दिया। पति का आरोप है कि शाम को ही अस्पताल कर्मियों ने कुछ घंटे पहले पैदा हुई बच्ची और उसकी मां प्रियंका को अस्पताल से निकाल दिया। पति ने चिकित्सकों से और रुकने के लिए गिड़गिड़ाया पर चिकित्सक नहीं पसीजे। घर लौटते ही रात 8 बजे के करीब प्रियंका की हालत बिगड़ने लगी तो फिर एंबुलेंस को बुलाने की कोशिश हुई लेकिन फिर एंबुलेंस नहीं मिली। राजेश किराए की गाड़ी लेकर फिर प्रियंका को किशनी अस्पताल ले गया। हालांकि यहां से उसे एंबुलेंस से सैफई रेफर कर दिया गया। जहां प्रियंका को मृत घोषित कर दिया गया।

पति राजेश की बेहद खराब है आर्थिक हालत

किशनी। प्रियंका की मौत से राजेश का परिवार बुरी तरह टूट गया। उसके तीन बच्चे विजय 5 वर्ष, कृष्णा 4 वर्ष, शिवानी 3 वर्ष पहले से थे और शुक्रवार को एक बच्ची और पैदा हो गई। प्रियंका शारीरिक रूप से कमजोर थी ऐसा ग्रामीणों का कहना है। बेहद गरीब राजेश कार्यक्रमों में नेग मांगकर और मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करता था। उसे सरकार की किसी भी योजना का लाभ भी नहीं मिला था। तीन दिन पूर्व उसका कच्चा मकान भी गिर गया। ग्रामीणों का कहना था कि प्रसव के तत्काल बाद खुले आसमान के नीचे रहने के चलते प्रियंका की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई।

प्रियंका की मौत ने सरकारी योजनाओं पर खड़े किए सवाल

किशनी। प्रियंका की मौत ने सरकारी योजनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार के निर्देश हैं कि गर्भवती महिला को अस्पताल एंबुलेंस से लाया जाएगा और एंबुलेंस से ही घर छोड़ा जाएगा। इसके अलावा कम से कम 48 घंटे महिला को प्रसव के बाद अस्पताल में रखने के निर्देश भी हैं। साथ ही साथ गर्भवती महिला के पोषण के लिए भी सरकार ने विभिन्न योजनाएं चला रखी हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्री, आशा को भी इसकी विशेष रूप से जिम्मेदारी दी गई। बावजूद इसके प्रियंका की मौत हो गई। इस संबंध में किशनी सीएचसी के चिकित्सक शंभू सिंह ने महिला को अस्पताल से निकालने की बात से इंकार किया है। उनका कहना है कि महिला का पति अपनी मर्जी से घर ले गया था। एंबुलेंस से उसे सैफई भेजा गया था। उन्होंने उसे निकाला नहीं है। आरोप झूठा है।

मैनपुरी के सीएमओ डा. अशोक पांडेय ने बताया कि घटना के बारे में जानकारी मिली है। पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट प्रभारी चिकित्सक से मांगी गई है। एसीएमओ को मौके पर भेजकर अलग से रिपोर्ट ली जाएगी। दोषियों पर कार्रवाई होगी?

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