अगले सुनवाई 10 जनवरी को, राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर महज 60 सेंकेड में SC ने कहा

राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टाल दी है। अब 10 जनवरी को नई बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें अयोध्या मामले की त्वरित और रोज़ाना सुनवाई की मांग की गई थी। आपको बता दें कि जनहित याचिका वकील हरीनाथ राम ने नवंबर, 2018 में दाखिल की थी।

दरअसल, राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के मामले पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ सुनवाई कर रहे थे। इस पीठ द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय जजों की पीठ गठित किए जाने की उम्मीद की जा रही थी।

यह मामला ऐसे समय में जोर पकड़ रहा हैं जब लोकसभा चुनाव में कुछ ही महीने बचे हैं और तमाम हिंदूवादी संगठन सरकार पर अध्यादेश लाने का दबाव बना रहे हैं। साल के पहले दिन एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया कि अयोध्या में राम मंदिर के मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अध्यादेश लाने के बारे में विचार किया जायेगा।

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मामले की सुनवाई की तारीख और बेंच पर फैसला करने की बात कही थी। उसी दिन केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा था कि केंद्र सरकार चाहती है कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई रोजाना के आधार पर हो।

हाईकोर्ट ने इस विवाद पर अपने फैसले में 2.77 एकड़ भूमि का सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच समान रूप से बंटवारा करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 29 अक्टूबर को कहा था कि यह मामला जनवरी के प्रथम सप्ताह में उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध होगा, जो इसकी सुनवाई का कार्यक्रम निर्धारित करेगी। बाद में अखिल भारत हिंदू महासभा ने अर्जी दायर कर सुनवाई की तारीख पहले करने का अनुरोध किया था, जिससे कोर्ट ने इनकार कर दिया था।

इससे पहले 27 दिसंबर, 2018 को तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 2-1 के बहुमत से 1994 के एक फैसले में की गई टिप्पणी पांच जजों की पीठ के पास नए सिरे से विचार के लिए भेजने से इनकार कर दिया था। दरअसल इस फसले में टिप्पणी की गई थी कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है।

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