Home हेल्थ कमर दर्द को न करें इग्नोर, हो सकती है खतरनाक बीमारी…..

कमर दर्द को न करें इग्नोर, हो सकती है खतरनाक बीमारी…..

 आज के समय में भागदौड़ भरी लाइफ और खराब लाइफस्टाइल के कारण कमर दर्द होना एक आम समस्या हो गई है। लेकिन कभी-कभी ये मामूली सी दिखने वाली बीमारी आपके लिए खतरनाक साबित हो सकती है। जी हां डॉक्टर्स के अनुसार आज के समय में कमर दर्द की समस्या को लोग ध्यान नहीं देते है, लेकिन आगे जाकर ये ‘स्पाइनल टीबी’ का रुप ले लेती है। जो कि खतरनाक साबित हो सकता है।

स्पाइनल टीबी की चपेट में युवा सबसे ज्यादा आ रहे है। इसके साथ ही कभी-कभी प्रेग्नेंसी के समय महिला को भी स्पाइनल टीबी होने का खतरा रहता है। इसलिए तुरंत डॉक्टर से सपंर्क करें। जानिए क्या है ये और कैसे करें इससे बचाव। WHO की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 20 लाख से ज्यादा टीबी के मरीज सामने आए हैं जिनमें से 20 प्रतिशत यानि करीब 4 लाख लोगों को स्पाइनल टीबी या रीढ़ की हड्डी में टीबी की शिकायत है। इनकी मृत्यु दर 7 प्रतिशत है। 2016 में 76 हजार बच्चों में स्पाइनल टीबी पाई गई थी जिसमें 20 हजार मामले दिल्ली और उत्तर प्रदेश

अगर आपको लगातार 10 दिन से ज्यादा रीढ़ में दर्द की शिकायत है, तो तुरंत डॉक्टर से मिले। आपको बता दें कि 10 फीसदी लोग जिन्हें पीठ दर्द की शिकायत होती है उन्हें रीढ़ की टीबी हो जाती है। जिसके कारण कई लोगों को लकवा भी हो जाता है।आपको बता दें कि टीबी के कीटाणु फेफड़े से खून में पहुंचते हैं और कई बार रीढ़ की हड्डी तक इसका प्रसार हो जाता है। बाल और नाखून छोड़कर टीबी शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है।

लक्षण

रीढ़ की हड्डी में अधिक दर्द होना।
रीढ़ की हड्डी में झुकाव।
पैरों और हाथों में अधिक कमजोरी आना।
पीठ का अकड़ जाना।
रीड़ की हड्डी में सूजन
सांस लेने में समस्या होना।
यूरीन पास करने में समस्या।
वजन कम होना।
उल्टी होना।
बुखार।
कमर दर्द।
ट्रिटमेंट
डॉक्टरों के अनुसार रीढ़ की हड्डी में होने वाली टीबी इंटर वर्टिबल डिस्क में शुरु होती है। जो कि पूरी रीढ़ की हड्डी में फैल जाता है। अगर इसका इलाज समय में न किया जाएं तो आपको लकवा भी हो सकता है। स्पाइनल टीबी को दूर होने में कम से कम 12 से 14 माह लग जाते है।

 

भूलकर भी बीच में न छोड़े ट्रिटमेंट
अगर आपको इस बारें में पता चल गया है तो पूरा इलाज कराएं। भूलकर भी इसे बीच में न छोड़े। ऐसा करने से रीढ़ की हड्डी गल जाती है, जिससे स्थायी अपंगता आ जाती है। किसी भी आयु वर्ग के लोग रीढ़ की हड्डी के टीबी का शिकार हो सकते हैं। टीबी बैक्टीरिया शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे दिमाग, पेट और अन्य हड्डियों को भी प्रभावित कर सकता है।

 

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