देश को एक बार फिर सोने की चिड़िया बना सकती है ये दौलत

इतिहास में आज भी ऐसे प्रमाण हैं, जिनके मुताबिक आज भी देशभर की अलग-अलग जगहों पर अकूत खजाना छुपा हुआ है। कहा जाता है कि इन खजानों की रक्षा कुछ दैवीय शक्तियां कर रही हैं और उनके पास तक कोई नहीं फटक सकता।

ये मंदिर कर्नाटक के पश्चिमी घाट के कोल्लूरके नीचे की तरफ है। इस मंदिर की सालाना आय 17 करोड़ है। मंदिर के पुजारियों के अनुसार ‘नाग’ का चिन्ह होने के कारण मंदिर के नीचे बहुत बड़ा खजाना है। ये ‘नाग’ मंदिर को बाहरी ताकतों से बचाता है। अगर खजाने को छोड़ भी दें, तो भी मंदिर में 100 करोड़ रुपए के गहने हैं।

कृष्णा नदी का खजाना, आध्र प्रदेश

दुनिया के सबसे बेहतरीन हीरों का खनन कृष्णा नदी के किनारे कोल्लुर में हुआ था। गोलकुंडा राज्य का यह भाग आज कृष्णा और गुंटूर जिले हैं। माना जाता है कि आज भी हीरे की बहुत बड़ी खेप वहां मौजूद है। कोहीनूर हीरा भी इसी जगह से आया था।

चारमीनार सुरंग, हैदराबाद

माना जाता है कि चारमीनार और गोलकुंडा को जोड़ना वाली सुरंग में बहुत बड़ा खजाना छुपा है। प्राचीन कहानियों के अनुसार इस सुरंग का निर्माण सुल्तान मोहम्मद कुली कुतुब शाह ने शाही परिवार के लिए करवाया था, जिससे कि जरूरत पड़ने पर वो किले से चारमीनार आसानी से जा सकें। 1936 में निजाम मीर उस्मान अली को एक रिपोर्ट भी दी गई, मगर उन्होंने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। माना जाता है कि आज भी सुरंग में खजाना मौजूद है।

नादिर शाह का खजाना

ईरानी आक्रमणकारी नादिर शाह ने 1739 में भारत पर हमला किया और 50,000 सैनिकों के साथ दिल्ली में घुसा। भारी लूटपाट के साथ नादिर शाह ने 20,000-30,000 लोगों का नरसंहार भी किया। कहा जाता है कि लूट इतनी बड़ी थी कि वापस जाते समय उसका खेमा 150 मील लंबा था। नादिर शाह ने करोड़ सोने के सिक्के, हीरे-जवाहरात से भरी बोरियाँ, पाक तख्त-ए-तौर (जो अब ईरान में हैं) और विख्यात, कोहीनूर हीरा लूटा, जो अब ब्रिटिश राजमुकुट में हैं।

सोनभंदर गुफाएं, बिहार

सोनभंदर की गुफाएं बिहार के राजगीर की एक बड़ी चट्टान में मौजूद हैं। यहां बनी दो गुफाओं में पश्चिमी शिलालेख के कारण इन्हें ईसा पूर्व तीसरी या चौथी सदी में का माना जाता है। माना जाता है कि इन गुफाओं में से एक रास्ता सम्राट बिंबिसार के सरंक्षित खजाने की ओर जाता है। अंग्रेजों ने इस गुफा को तोप से उड़ाने का प्रयत्न किया, मगर वो असफल रहे। सोन भंडार गुफा में अंदर प्रवेश करते ही 10.4 मीटर लंबा चौड़ा और 5.2 मीटर चौड़ा कमरा है। इस कमरे की ऊंचाई लगभग 1.5 मीटर है। यह कमरा खजाने की रक्षा करने वाले सैनिकों के लिए बनाया गया था। इसी कमरे के दूसरी ओर खजाने का कमरा है जो कि एक बड़ी चट्टान से ढंका हुआ है। मौर्य शासक के समय बनी इस गुफा की एक चट्टान पर शंख लिपि में कुछ लिखा है। इसके संबंध में यह मान्यता प्रचलित है कि इसी शंख लिपि में इस खजाने के कमरे को खोलने का राज लिखा है।

मीर उस्मान अली का खजाना, हैदराबाद

मीर अली उस्मान हैदारबाद के आखरी निजाम थे। उन्होंने इंग्लैंड के बराबर राज्य पर हुकुमत की। 2008 में फोर्ब्स मैगजीन ने उन्हें 210 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया के सर्वकालिक सबसे धनी लोगों में पांचवे पायदान पर रखा। कहा जाता है कि उनका खजाना कोठी महल, हैदराबाद के नीचे गड़ा हुआ है, जहां उन्होंने अपनी अधिकतर जिंदगी बिताई। हालांकि, उनकी संपत्ति का असल हिसाब या आंकलन किसी के पास नहीं।

अलवर का मुगल खजाना, राजस्थान

अलवर का किला दिल्ली से 150 किलोमीटर दूर, राजस्थान के अलवर जिले में हैं। लोककथा के अनुसार, मुगल राजा जहांगीर ने अपने निर्वासन के समय यहां शरण ली थी और अपना खजाना यहीं छुपाया था। कहा जाता है कि खजाना का बहुत बड़ा हिस्सा अब भी किले में ही छुपा है। मुगल साम्राज्य से पहले भी अलवर का राज्य बेहद संपन्न था। यहां के कप पन्ने से बनाएं जाते थे।

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