कलियुग के इस एकलव्य ने देश का नाम किया रोशन, एशिया कप तीरंदाजी में भारत को दिलाया गोल्ड

कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का तमन्ना हो, तो बड़ी से बड़ी रूकावट भी आपके रास्ते से खुद-ब-खुद दूर हो जाती हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है झारखंड के जनजातीय परिवार से संबंध रखने वाले गोरा ने। गोरा ने बैंकॉक में आयोजित एशिया कप स्टेज आई आर्चरी मीट में गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। इस मेडल को पाने में गोरा तीन सदस्यीय टीम का हिस्सा थे। गोरा ने अपने पार्टनर आकाश और गौरव के साथ मिलकर यह उपलब्धि हासिल की। इन तीनों खिलाड़ियों ने मंगोलिया को हराकर प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया।

सरायकेला-खरसावां जिला के निवासी गोरा के लिए तो यह पहला मौका है जब उसने इस स्तर का खिताब अपने नाम किया है। अपनी मेहनत से गोरा ने पहली बार रिकर्व वर्ग में राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल करके सबको चौंका दिया। इसमे कोई दो राय नहीं है कि गोरा में तीरंदाजी की अध्भुत प्रतिभा है, 2015 में बाल दिवस पर उसे राष्ट्रपति भवन तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ प्रणव मुखर्जी सम्मानित कर चुके है। उस समय गोरा की उम्र करीब 14 साल थी।

गरीब किसान परिवार से संबंध रखने वाले गोरा 4 भाइयों में सबसे छोटे हैं। उनके 50 वर्षीय पिता खेरू हो पिछले 2 साल से लकवा का अटैक आने के बाद से बिस्तर पर है। दो साल पहले 2016 में गोरा की मां का निधन हो गया था। अभी उसके तीनों बड़े भाई उनकी देखरेख करते हैं। झारखंड सरकार ने भी उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें 2 लाख 70 हजार का धनुष उन्हें दिया था। इतनी परेशानियों के बावजूद वह अपने सपने को पूरा करने के लिए मेहनत कर रहे हैं।

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