MSP मात्र 5 गुना जबकि डीजल की कीमतें 12 गुना बढ़ गईं : नवजोत सिद्धू

पंजाब के लोकल बाडीज मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने तेल की बढ़ती कीमतों पर चिंता व्यक्त करते हुए केन्द्र सरकार से मांग की है कि डीजल-पैट्रोल को जी.एस.टी. के दायरे में लाया जाए ताकि आम लोगों को इसका लाभ पहुंचे।

आज एक विशेष भेंट में सिद्धू ने कहा कि 1992 में डीजल की कीमत 6 रुपए प्रति लीटर के आसपास थी और उस समय गेहूं की एम.एस.पी. 330 जबकि धान की एम.एस.पी. 270 थी। आज डीजल की कीमतें 12 गुणा से ज्यादा बढ़ गई हैं जबकि फसलों की एम.एस.पी. में मात्र 5 गुणा वृद्धि हुई है। मोदी सरकार ने स्वामीनाथन रिपोर्ट को लेकर पिछले दिनों दावा किया था कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य है, परंतु जिस प्रकार तेल की कीमतों और एम.एस.पी. में वृद्धि दर का अंतर है उससे मोदी सरकार का यह दावा जुमला ही साबित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि यू.पी.ए. सरकार के कार्यकाल दौरान कच्चे तेल की कीमतें 150 डालर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं परंतु प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने डीजल व पैट्रोल की कीमत 60-70 रुपए से ज्यादा नहीं होने दी। जब मोदी सरकार ने देश की सत्ता सम्भाली तब कच्चा तेल 40 डालर प्रति बैरल से भी कम था। घटी कीमतों का देश वासियों को कोई लाभ नहीं हुआ बल्कि सारा फायदा तेल कम्पनियों व अन्य को पहुंचा दिया गया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार वन नेशन वन टैक्स का दावा करती है परंतु सबसे बड़ी उपभोग की वस्तु तेल पर कई तरह के टैक्स हैं। अगर पैट्रोलियम पदार्थों को 18 प्रतिशत जी.एस.टी. स्लैब में ले आया जाए तो तेल की कीमत 45 रुपए प्रति लीटर के आसपास हो जाएगी जिससे महंगाई से त्रस्त हो रहे लोगों को सीधा फायदा पहुंचेगा।

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