बेटे सलमान के बचाव में आए बाप सलीम खान की सफाई, कानून का उल्लंघन नहीं किया

सलमान खान के पनवेल वाले फार्म हाउस को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. जहां एक तरफ NRI दंपति ने खान परिवार पर ये आरोप लगाया था कि उन्हें उन्हीं की जमीन पर घर बनाने नहीं दिया जा रहा, वहीं दूसरी ओर एक वन अधिकारी के जबरन तबादले का मामला भी सामने आया है. अब इन आरोपों पर सलीम खान ने अपना रुख साफ किया है. उन्होंने इन सभी आरोपों को खारिज किया है.

एक हिंदी चैनल को दिए इंटरव्यू में सलीम खान ने कहा कि सबसे पहले तो कक्कड़ दंपति ये साबित करे कि ये जमीन उनकी है. वे प्रूफ दिखाएं उसके बाद ये कहें कि उन्हें घर नहीं बनाने दिया जा रहा. हमने पनवेल वाला फार्म हाउस सरकारी नियमों के तहत बनाया है और इस फार्म हाउस को बनाने में किसी भी तरह के नियमों का उल्लघंन नहीं किया गया है. मेरे लीगल एडवाइजर ने इन सभी बातों का ख्याल रखा है कि सारे काम नियमों के अनुसार हों.

कक्कड़ परिवार के अलावा वन अधिकारी एसएस कापसे के तबादले वाले मामले पर सलीम खान ने कहा कि इस मामले से उनका कोई लेना देना नहीं है और उन्हें कापसे का नोटिस भी उनके तबादले के एक दिन बाद मिला था.

सलीम खान ने आखिर में ये भी कहा कि वो एक पुलिस अधिकारी के बेटे हैं कभी कोई गलत काम नहीं करते. बता दें कि इंडिया टुडे को मिले सरकारी दस्तावेज के मुताबिक महाराष्ट्र के वन विभाग ने सलमान खान के परिवार को पनवेल में स्थित फार्महाउस में कथित निर्माण को लेकर कारण बताओ नोटिस भेजा है.

खान परिवार के पास वजापुर में स्थित अर्पिता फार्म्स का मालिकाना हक है. इस क्षेत्र को 2003 में पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील घोषित किया गया था. वजापुर के वन अधिकारी एसएस काप्से की ओर से 9 जून 2018 को नोटिस जारी किया गया. इसके मुताबिक पनवेल में संबंधित जगह पर 11 निर्माण पाए गए हैं जिनके मालिकाना हक खान परिवार के छह सदस्यों के नाम पर हैं.

इनके अलावा दो निर्माण ऐसे हैं जो 2003 से पहले के हैं. सरकारी ‘कारण बताओ नोटिस’ के मुताबिक बाकी सभी 11 निर्माण उस अधिसूचना के जारी होने की तारीख के बाद किए गए, जिस अधिसूचना के तहत इस जोन में नई इमारतों के निर्माण पर रोक लगा दी गई थी. 9 जून 2018 को भेजे गए नोटिस में खान परिवार से एक हफ्ते में जवाब मांगा गया. मराठी में भेजे गए सबसे ताजा पत्र में लिखा गया है, ‘पूर्व में 21 नवंबर 2017 को जारी नोटिस के मुताबिक आपके अर्पिता फॉर्म्स में सीमेंट/कंक्रीट निर्माण को लेकर वन अधिनियम के उल्लंघन का अपराध दर्ज किया गया है. पत्र में आगे लिखा गया है, ‘इस दफ्तर की ओर से दस्तावेज को चेक किए जाने के बाद ऐसा लगता है कि आप ऐसे अवैध निर्माण बार-बार कराते रहे. ये अपराध अर्पिता फार्म्स पर किए गए हैं.’

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