भारत में शहीद के दर्ज़े को तरसते भगत सिंह का सम्मान पाकिस्तान में

शहीदे आजम भगत सिंह को भारत सरकार ने आज तक शहीद का दर्जा नहीं दिया है, मगर वतन के लिए 23 साल की उम्र में ही फांसी के फंदे को चूमने वाले भारत माँ के इस अमर शहीद के चाहने वाले मुल्क के बाहर पडोसी मुल्क पाकिस्तान में कम नहीं है. पाक सरकार पहली बार ऐतिहासिक दस्तावेजों के बीच सोमवार को भारत के स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह मुकदमे की प्रदर्शनी लगा रही है. यह निर्णय पंजाब सरकार के शीर्ष नौकरशाहों के मुख्य सचिव जाहिद सईद की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया.

जिन्होंने क्रांतिकारी भगत सिंह को भारत और पाकिस्तान दोनों के हीरो के रूप में घोषित किया था. सूत्रों के अनुसार बैठक में यह फैसला हुआ कि भगत सिंह भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए स्वतंत्रता संग्राम के हीरो थे. पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि देश के लोगों को सिंह और उनके साथियों को ब्रिटिश राज से स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए महान संघर्ष के बारे में जानने का अधिकार है. पाक सरकार ने आधिकारिक रूप से कहा कि इस संबंध में लाहौर स्थित अनारकली मकबरे में एक प्रदर्शनी लगाई जाएगी.

गौरतलब है कि भगत सिंह को लेकर पाकिस्‍तान की अवाम का कहना है कि वे भारत के हैं उतने ही पाकिस्‍तान के भी. शहीद-ए-आजम भगत सिंह का जन्‍म 28 सितंबर 1907 को फैसलाबाद, लायलपुर (वर्तमान में पाकिस्‍तान) के गांव बंगा में हुआ था. उनका जन्‍म और शहादत दोनों आज के पाकिस्‍तान में हुआ था. इसलिए वहां के लोग उन्‍हें नायक मानते हैं. वहां के लोगों ने आखिर लाहौर के शादमन चौक का नाम बदलकर भगत सिंह चौक करवा लिया था .वहां बड़ा तबका भगत सिंह को अपना हीरो मानता है.

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