इस मंदिर में दर्शन मात्र से सब हो जाते हैं ठीक, भूत-प्रेत का हो साया..या हो कोई भी गंभीर रोग

 कलयुग के भगवान हनुमानजी के आपने कई मंदिर देखें होंगे, लेकिन आज जिस मंदिर के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं वो अपने आप में सबसे अनोखा मंदिर है। कानपुर शहर से 50 किमी की दूरी पर स्थित मूसानगर कस्बे के पास यमुना नदी के किनारे एक सैकड़ों साल पुरानी बालाजी का मंदिर (Balaji Temple) है।

मान्यता है कि मंगलवार या शनिवार को कोई भी व्यक्ति जो भूत-प्रेत और असाध्य रोगों से ग्रसित है, यहां आकर पेश हो जाए तो वह महज 15 मिनट में ठीक हो जाता है। बुढवा मंगल के मौके पर यहां कानपुर के अलावा आसपास के दर्जनों जिलों से भक्त आते हैं और बलाजी महाराज (Balaji Temple) के दरबार में हाजिरी लगाते हैं।

15 बीघा जमीन पर बना है यह मंदिर

मूसानगर कस्बे में भगवान बालाजी (बजरंगबली) का सैकड़ों साल पुराना मंदिर यमुना के किनारे करीब 15 बीघे में बना है। यहां पर दूर-दराज से रोगों से ग्रसित भक्त आते हैं अैर बालाजी के सामने पेश होकर इनसे छुटकारा दिलाने की फरियाद लगाते हैं। मंदिर के पुजारी रघुबीर शुक्ल ने बताया कि पहले एक छोटी से कुटिया में बालाजी महाराज विराजमान थे। लेकिन इस भव्य मंदिर का निर्माण 1996 में मेहन्दीपुर बालाजी महाराज के बगंरा जिला जालौन निवासी छोटे महाराज के सानिध्य में ओम प्रकाश शर्मा की देखरेख में हुआ।

भैरव के बीच विराजमान हैं बालाजी महाराज

मंदिर के पुजारी के मुताबिक 2001 में मंदिर परिसर के अंदर दाएं प्रेतराज महाराज की प्रतिमा तो बाईं ओर बटुक भैरव जी महाराज की प्रतिमा स्थापित करवाई गई। वहीं बीच में बालाजी महाराज (बाल हनुमान) की स्थापित प्रतिमा हजारों साल से श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है। यह पूरे मंडल में इकलौता मंदिर है, जहां प्रेतराज और भैरव नाथ के साथ बालाजी महाराज विराजमान है। पुजारी ने बताया कि बालाजी के आदेश कि बाद प्रेतराज और भैरव बाबा रोग से ग्रसित भक्तों को प्रेत आत्माओं से निजाद दिलाते हैं।

आते हैं रोते हुए, जाते हैं हंसते हुए

बालाजी महाराज के दरबार पर अधिकतर भक्त अनेक रोगों से पीड़ित होते हैं रोते-बिलखते हुए आते हैं। मंदिर के पुजारी रोगी भक्तों को ले जाकर बालाजी के दरबार के सामने पेश करते हैं। रोगी जैसे ही महाराज के पास पहुंचता हैं, और पुजारी लाल अबीर उनके माथे पर लगाते हैं वैसे ही वह ठीक होकर हंसते हुए अपने घर के लिए निकल जाते हैं। घाटमपुर से हनुमान जयंती के दिन लल्लन यादव, जो अपने छोटे भाई को लेकर पहुंचे। लल्लन का भाई दो साल से बीमार चल रहा था। लाखों रूपए का इलाज करवाया, पर वह ठीक नहीं हुआ। इसी के चलते वह भाई को यहां लेकर आए। बालाजी की पूजा-अर्चना के बाद उसे आराम मिल गया।

विशेष दिनों पर लगता है मेला

आस्था के केंद्र बालाजी धाम मे प्रति वर्ष हनुमान जयंती के मौके पर हजारों की संख्या में भक्त जुटते हैं। वार्षिक उत्सव कार्यक्रम मे आस-पास क्षेत्र के अतिरिक्त कानपुर बाराबंकी, फतेहपुर, झांसी ,बांदा ,इटावा, औरैया, उन्नाव, कन्नौज, हमीरपुर आदि जनपदों से भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर परिसर के बाहर विशाल मेले का भी आयोजन होता है। मन्दिर मे प्रत्येक शनिवार व मगंलवार को भक्तों की भीड़ लगती है।

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