आजकल बॉलीवुड में छाये है ये बॉलीवुड एक्टर,जाने कौन हैं ये….

राजकुमार राव की लोकप्रियता और बॉक्स ऑफिस पर बढ़ती पकड़ का एहसास हुआ शादी में ज़रूर आना की सफलता के बाद। सीधा साधा आशिक मिजाज़ लड़का सत्तू जब मोहब्बत की आग में जलता प्रतिशोधी सत्येंद्र बनता है तो आपका मन ऐसे अभिनय के लिए खड़े होकर ताली बजाने के लिए करता है।

पूरी फ़िल्म को राजकुमार राव ने अपने कन्धों पे संभाला था ख़ास कर जब वो अपने साले को ताबड़तोड़ थप्पड़ मारते हैं तो आपको लगता है के ये आदमी अपने पात्र में कितना डूब के एक्टिंग करता है।

एक बार ऐसे ही एक मित्र से हॉरर फिल्मों पर चर्चा हो रही थी , किन्हीं कारणों से हॉरर फिल्मों का ज़बरदस्त फैन होने के बावजूद मैने तब तक रागिनी एमएमएस नही देखी थी। तब इस मित्र के बहुत तारीफ करने पर मैने रागिनी एमएमएस देखी फ़िल्म के शानदार निर्देशन से तो मैं प्रभावित हुआ ही लेकिन रागिनी का कमीना बॉयफ्रेंड मुझे बहुत ज़बरदस्त कलाकार लगा। तब इंटरनेट से उस कलाकार का नाम मालूम किया राजकुमार राव। तब मुझे लगा कलाकार बहुत ज़बरदस्त है लेकिन क्या सामान्य कद काठी का ये लड़का बॉलीवुड में असर छोड़ पायेगा। मुझे शक था के कई अच्छे कलाकारों की तरह शायद ये लड़का ज़्यादा आगे न जा पाए।

मेरा सारा शक दूर हो गया जब काई पो चे नाम की एक फ़िल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई कर डाली। पूरी फ़िल्म अच्छे अभिनय ,संवादों और दृश्यों से भरी पड़ी थी। लेकिन राजकुमार राव का पात्र गोविन्द पटेल एक बार फिर अपने सहज अभिनय से बाज़ी मार ले गया। राजकुमार राव का अभिनय तो अच्छा था ही लेकिन यूए मानना पड़ेगा के दोनों फिल्मों की सफलता ने उनके नाम का सिक्का चलने में मदद की।

राजकुमार राव के लिए शाहिद , शैतान और फिर क्वीन की धमाकेदार सफलता ने और नाम बनाया। लेकिन शाहिद को छोड़ दें तो लगभग ज़्यादातर फिल्मों में उनका पात्र कमीना या नकारात्मकता भरा होता था। कुछ कुछ खलनायक की इमेज उनकी बन रही थी। फिर भी दर्शकों को उनका सहज अभिनय करने का तरीका पसंद आ रहा था। इन फिल्मों में ये दिख रहा था के राव हरेक पात्र को अपना बना लेते हैं और उनके अभिनय करने के तरीके में एक शांत आत्मविश्वास दिख रहा था।

साल २०१७ उनके लिए बहुत बड़ा रहा जब तीन फिल्मों की ज़बरदस्त सफलता ने उन्हें लगभग नायकों की कतार में ला खड़ा कर दिया है ये तीन फिल्में थी बरेली की बर्फी , न्यूटन और शादी में ज़रूर आना।

इन तीनों फिल्मों ने उन्हें नकारात्मक पात्रों की यादों से आगे आने में बहुत सहायता की है , तीनों फिल्मों में जब जब राव परदे पर थे तब तब दर्शक उनके अलावा किसी और की तरफ देख ही नही रहे थे। बरेली की बर्फी का डरपोक लेकिन तेज़ दिमाग और दिल का अच्छा प्रीतम विद्रोही दर्शकों को बार टिकट खिड़की तक खींच लाया ये मानना होगा के प्रीतम विद्रोही के पात्र ने पूरी फ़िल्म को देखने लायक और एक आम उबाऊ प्रेम त्रिकोण होने से बचाया।

न्यूटन का उनका सीधी लाइन में चलने वाला सरकारी अफसर का अभिनय और उनके पंकज त्रिपाठी से अभिनय टकराव ने न्यूटन की बॉक्स ऑफिस सफलता पक्की कर दी दर्शकों को दिल जीतना तो उनके लिए इस फ़िल्म के आते आते बाएं हाथ का खेल बन चुका था।

दर्शकों को अपने अभिनय से राजकुमार राव ने जीत लिया है। उनका अभिनेता कद उनके अपने कद से तो अब कहीं ऊंचा है , वो अब बॉलीवुड के छह फुटे अभिनेताओं से अभिनय में कहीं भी उन्निस नज़र नहीं आते।

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