भारत का एक ऐसा स्थान जहां भाई-बहन का प्रवेश है वर्जित,जानिए क्यों है इतनी खास ये मीनार….

भारत में कई ऐसी जगह है। जो कि अपनी किसी न किसी खासियत के कारण प्रसिद्ध है। हर किसी धरोहर के पीछे एक कहानी होती है। ऐसी है उत्तर प्रदेश में एकर मीनार है। जिसकी कहानी ही कुछ हटकर है। जी हां एक ऐसी मीनार जहां पर सिर्फ प्रेमी-प्रेमिका या फिर पति-पत्नी जा सकते है। भाई-बहन का प्रवेश वर्जित है। जानिए क्यों है इतनी खास ये मीनार। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में एक 210 मीटर ऊंची मीनार है। जिसे लंका मीनार के नाम से जाना जाता है।

 

इस मीनार को बनाने के लिए ईट, पत्थर, बालू नहीं बल्कि नार्मल चीजों का यूज किया गया है। इसे बनाने में उड़द की दाल, शंख, कौड़िया, सीप आदि का इस्तेमाल किया गया है।यह मीनार देशभर की सबसे ऊंची मीनारों में से एक मानी जाती है। इसके पास 100 फुट ऊंची कुंभकर्ण और 65 फुट ऊंची मेघनाथ की प्रतिमा है। इसके अलावा मीनार के सामने भगवान शंकर और चित्रगुप्त की मूर्ती लगी है। इस मीनार की ऐतिहासिक खूबी यह है कि इसमें केवल रावण नहीं बल्कि उसके पूरे परिवार का चित्रण मिलता है। कई पौराणिक घटनाओं को भी यहां चित्रों में उकेरा गया है।

इस मीनार के पास हर साल नाग पंचमी के दिन मेला लगता है। इसके अलावा यहां पर दंगल भी होते रहते है। इस मीनार को साल 1875 में रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले रावण जो कि रामलीला का आयोजन भी करने वाले मथुरा प्रसाद निगम ने कराया था। उस समय इसे बनाने में 1 लाख 75 बजार रुपए लगे थे। जिसे बनाने में करीब 20 साल लगे थे। हिंदू शास्त्रों के अनुसार विवाह में सात फेर लेने से लड़का-लड़की विवाह के बंधन में बंध जाते है। इसी तरह इस मीनार की छत में पहुंचने के लिए घुमावदार रास्ता है। जो कि पूरे 7 फेरे करता है।

 

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