International Literacy Day : लखनऊ में बुजुर्ग महिलाएं फैला रहीं शिक्षा का उजियारा

पढ़ने लिखने की कोई उम्र नहीं होती। आपने यह कई बार सुना होगा लेकिन, राजधानी के बंथरा क्षेत्र की कुछ बुजुर्ग महिलाओं ने इसे साबित कर दिखाया है। उम्र के कई दशक पार कर चुकीं इन बुजुर्ग महिलाओं ने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा था। अब साक्षरता का महत्व समझ में आया तो  बदलाव की मुहिम में जुट गईं। कसम खाई है कि उनके परिवार में या आसपास कोई अनपढ़ न रहे। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के मौके पर साक्षरता की मशाल को आगे बढ़ा रहे इन कर्मवीरों पर पेश है एक रिपोर्ट…।
 जरूरतमंद छात्रों के लिए यहां चलती है स्पेशल क्लास :  एमडी शुक्ला इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य डॉ. हरिनारायण उपाध्याय ने गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष क्लासेज की शुरुआत की है। गर्मी की छुट्टियों में इन बच्चों को विशेष रूप से पढ़ाते हैं।  स्कूल में दाखिले के बाद कमजोर बच्चों को वह खुद पढ़ाते हैं।
घर-घर से फैलाया जा रहा है साक्षरता का मंत्र : राजधानी में 100 प्रतिशत साक्षरता फैलाने की उद्देश्य से ग्लोबल ड्रीम प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है। वर्तमान में सरोजनीनगर के करौनी गांव में  वालेंटियर साक्षरता शिविर चलाया जा रहा है। डॉ. सुनीता गांधी ने बताया कि करौनी गांव में कोई स्कूल नहीं है। विशेषकर महिलाओं की साक्षरता के लिए कुछ भी नहीं था। यहां की 22 महिलाओं को जोड़ा गया।
दो पीढ़ी बाद समझ में आया साक्षरता का महत्व 
बंथरा क्षेत्र का कुरौनी गांव। 60 वर्षीय तेजवती ने कभी स्कूल की मुंह तक नहीं देखा था। घरवालों ने बचपन से ही खेतों के काम में लगा दिया गया। उसके लिए स्कूल जाना सिर्फ समय की बर्बादी थी। इसलिए तेजवती ने अपने बच्चों को भी स्कूल नहीं भेजा। कुछ दिन पहले गांव की चौपाल में चर्चा के दौरान साक्षरता शिविर की जानकारी मिली। कुछ महिलाओं को शिविर जाते देखा। हैरानी तब हुई जब उसी गांव की 55 वर्षीय अनपढ़ महिला सावित्री को तेजवती ने कागज पर कुछ लिखते हुए देखा। यहां से बदलाव शुरू हुआ। तेजवती न केवल खुद  साक्षरता शिविर गईं बल्कि, गांव की कई दूसरी महिलाओं को भी पढ़ने के लिए प्रेरित किया।

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