काशी में इंसान तो इंसान बैल भी भगवान की पूजा अर्चाना करते हैं…

 आज हम आप को भगवान शिव की नगरी यानी काशी के बारे में बताएंगे। काशी को भगवान शिव का गढ़ कहा गया है। काशी की तंग गलियों में आप को हर जगह बैल घूमते हुए नजर आएंगे। बैल को भगवान शंकर की सवारी कहा जाता है। शिवलिंग के पास नंदी की मूर्ति रखी होती है। काशी में इंसान तो इंसान बैल भी भगवान की पूजा अर्चाना करते हैं। काशी में बैल को शाही पशु माना जाता है। ऐसा माना जाता है यहाँ कोई भी बड़े से बड़ा अतिथि आ जाए उसे बैल की सवारी जरूर कराई जाती है।

आज हम आपको एक ऐसे मामले के बारे में बताएंगे जिसके सम्बन्ध में जानकर आप हैरान रह जाएंगे। दरअसल, आपने कई ऐसे टेम्पल  देखें होंगे जहां कुत्ते, चूहे, चिड़िया और कबूतर घुमते हुए दिखाई देते है, लेकिन आज हम आपको वाराणसी में रहने वाले ऐसे बैलों की बात बताने जा रहे है, जो हर रोज शिवजी के दर्शन करते हुए दिखाई देता है।

यहां बैल को शाही पशु माना जाता है। बता दें कि, यह पर ऐसी मान्यता है कि यहां कोई भी बड़े से बड़ा मेहमान आ जाए तो उसे बैल की सवारी जरूर कराई जाती है। वाराणसी म्युनिसिपल कारपोरेशन असलम अंसारी के मुताबिक, यहां 60 से भी ज्यादा बैलों का बहुत ही अच्छी तरह से देखरेख की जाती है।

वाराणसी म्युनिसिपल कारपोरेशन ने बताया कि यहाँ 60 से भी ज्यादा बैलों का अच्छे से ख्याल रखा जाता है। यहाँ बैलों के लिए कहा जाता है कि सांड तो काशी की पहचान है। उसको पकड़ना और बांध कर रखना काशी की पहचान मिटाने की साजशि है। वाराणसी में चाहे दूकान हो या मंदिर ये बैल आपको हर जगह घूमते नजर आएंगे। यहाँ आपको किसी न किसी मंदिर में बैल शिवजी के समक्ष बैठे नजर आएंगे।

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