घर से निकली थी भविष्य बनाने अपना लेकिन ऐसी दर्दनाक मौत ने छीन लिया सबकुछ……

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) ने सेंटर बदलने की पॉलिसी नकल रोकने के उद्देश्य से बनाई थी। इसके बावजूद पूरे राज्य में नकल के केस सामने आ रहे हैं और यूएमसी काटी जा रही हैं। बोर्ड ने पहली बार परीक्षा केंद्र 7 किलोमीटर के दायरे में शिफ्ट करने के आदेश दिए जिसे टीचर्स यूनियनों के विरोध पर घटाकर 3 किलोमीटर कर दिया। इसके बावजूद कई स्कूल ऐसे हैं, जिनके केंद्रों की दूरी 3 किलोमीटर से अधिक है।

कोट मेहताब स्कूल का केंद्र भी इन्हीं में से एक है। भलोजला गांव के बिक्रम, आकाशदीप और इंद्रपाल इस स्कूल के छात्र थे। वह ऑटो में स्कूल जाते थे। परीक्षा केंद्र गांव से 8 किलोमीटर दूर फेरुमन में आने के कारण तीनों बाइक पर पेपर देने जाते थे। अगर सेंटर अपने स्कूल में रहता तो वह ऑटो में ही पेपर देने जाते।

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की गलत नीतियों ने दो विद्यार्थियों की जान ले ली जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। रईया के गांव पड्‌डा में दो मोटरसाइकिलों के बीच आमने-सामने की टक्कर में 12वीं की छात्रा रमनदीप और 10वीं का पेपर देकर लौट रहे बिक्रम सिंह की मौत हो गई। बिक्रम का परीक्षा केंद्र फेरुमन सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में था जो उसके अपने सरकारी हाई स्कूल कोट मेहताब से 4.5 किलोमीटर दूर है जबकि बोर्ड ने सेंटर तीन किलोमीटर के दायरे में बनाने का ऐलान किया था।

रमनदीप कौर रईया के सरकारी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा थी और उसका परीक्षा केंद्र गुरु नानक सीनियर सेकेंडरी स्कूल रईया में था। अगर यह केंद्र उसके अपने स्कूल में होता तो रोल नंबर घर छूट जाने के बावजूद वह अपने प्रिंसिपल कम कंट्रोलर से लिखवाकर परीक्षा में बैठ सकती थी। दूसरे स्कूल में सेंटर होने के कारण ही उसे रोल नंबर लाने के लिए अपने गांव जाना पड़ा।

सीबीएसई को देखकर ने परीक्षा केंद्र दूसरे स्कूलों में बनाने का पैट्रन तो अपना लिया मगर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने की जिम्मेदारी बच्चों की अपनी ही थी। बोर्ड ने उन्हें न तो बसें उपलब्ध करवाई और न किसी अध्यापक की ड्यूटी लगाई, जो उन्हें परीक्षा केंद्र तक ले जा सकें।

एजुकेशन मिनिस्टर अरुणा चौधरी ने कहा कि उन्हें दो बच्चों की मौत पर अफसोस है मगर हर स्कूल में सेंटर नहीं बना सकते। सीबीएसई और आईसीएसई में भी सेंटर दूसरे स्कूलों में बनते हैं। सेंटर बनाने के बाद स्कूलों से पूछा था कि जिन्हें दिक्कत है, वे सेंटर बदलवा लें। कुछ ने लिखकर भेजा तो सेंटर बदल दिए। हो सकता है कि इस स्कूल ने लिखकर न भेजा हो। हर स्कूल को चैक नहीं किया जा सकता।

जब पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की सचिव हरगुण कौर से बात की गई तो उनका पहला रिएक्शन था…क्या यह मौत सेंटर दूर होने से हुई? जब उन्हें समझाया कि बच्चे सेंटर दूर होने के कारण ही बाइक लेकर गए थे तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

हादसे के सात घंटे बाद भी अमृतसर की डीईओ सुनीता किरण को दो परीक्षार्थियों की मौत का पता नहीं था। न ही स्कूल प्रिंसिपलों ने इसकी जानकारी उन्हें दी। भास्कर के पूछने पर किरण ने बताया कि वह स्कूल प्रिंसिपलों से घटना की जानकारी लेकर उच्चाधिकारियों को भेजेंगी।

डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के जिला प्रधान अश्वनी अवस्थी ने कहा कि दोनों बच्चों की मौत का जिम्मेदार शिक्षा विभाग है। यूनियनों ने पहले ही सेंटर शिफ्ट करने का विरोध किया था। स्पष्ट तौर पर कहा भी था कि बच्चों के आने-जाने के दौरान अगर हादसा हुआ तो जिम्मेदारी विभाग की होगी। किसी भी स्कूल में विद्यार्थियों को ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा नहीं दी गई। बच्चे खुद परीक्षा केंद्र तक जा रहे हैं। यही घटना अगर किसी प्राइवेट स्कूल के साथ होती तो पंजाब सरकार अब तक नोटिस निकालकर उसकी एफिलिएशन रद्द कर चुकी होती।

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