हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची CBSE

मद्रास हाईकोर्ट दुारा नीट परीक्षा को लेकर दिए गए आदेश के खिलाफ सीबीएसई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सीबीएसई ने मद्रास हाईकोर्ट के दिए गए उस आदेश  जिसमें  तमिल भाषा से इस वर्ष मेडिकल में प्रवेश की परीक्षा नीट में शामिल होने वाले सभी प्रतिभागियों को 196 अंक दिए जाने का फैसले दिया था और  सीबीएसई से उम्मीदवारों की रैंकिंग को संशोधित कर उसे फिर से प्रकाशित करने के लिए कहा था।  गौरतलब है कि इस आदेश के आने के बाद  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नीट यूजी की काउंसिलिंग पर रोक लगा दी थी। साथ ही दूसरी काउंसिलिंग के नतीजे भी रोक दिए गए थे। अब सुप्रीम कोर्ट से आदेश के बाद ही दोबारा काउंसिलिंग होगी।
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ये है पूरा मामला
दरअसल, पिछले दिनों कोर्ट में कुछ तमिल भाषा के छात्रों याचिका दायर करते हुए कहा था कि परीक्षा में 49 सवालों का अनुवाद गलत किया गया था, जिसके कारण वह उत्तर पुस्तिका में जवाब भी गलत भरकर आए हैं, ऐसे में उन्हें उन प्रश्नों के ज्यादा नंबर दिए जाए। कोर्ट में दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक प्रश्न 4 नंबर का था, इसलिए उन्हें 196 अंक ज्यादा दिए जाए । इस पर फैसला सुनाते हुए मदुरै पीठ के जस्टिस सीटी सेल्वम और जस्टिस एएम बशीर अहमद ने माकपा नेता टीके रंगराजन ने तमिल माध्यम से नीट देने वाले सभी 24,720 प्रतिभागियों को 196 अंक अतिरिक्त देने का आदेश दिया था।
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ये है सीबीएसई का मजबूत पक्ष 
सीबीएसई ने नीट की बुकलेट में स्पष्ट किया गया था कि हिन्दी समेत सभी क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद में गड़बड़ी होने पर अंग्रेजी में प्रकाशित सवाल को सही माना जाएगा।
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कोर्ट का आदेश पहली काउंसलिंग के बाद आया। ऑल इंडिया काउंसलिंग में 70 फीसदी सीटों पर एडमिशन पहले ही हो चुके हैं। दोबारा प्रक्रिया शुरू करने से हजारों छात्रों को परेशानी होगी।

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