राशन कार्ड वालों के लिए जरूरी खबर, पकड़े गए 2.75 करोड़ राशन कार्ड…

भारत में राशन कार्ड के नाम पर एक बड़े फर्जीफाड़े का उस वक्त खुलासा हुआ जब सरकार ने राशन कार्ड को पूरी तरह डिजिटल कर उसे आधार नंबर से लिंक कराने का फैसला किया।

आधार कार्ड लिंक होने से सरकार को देशभर में अब तक करीब 2.75 करोड़ जाली और डुप्लिकेट राशन कार्ड मिले हैं। इन सभी राशन कार्ड्स को सस्पेंड किया जा चुका है। दरअसल, इन राशन कार्डों का इस्तेमाल सब्सिडी वाली खाद्य सामग्री पाने के लिए किया जाता है।

खाद्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, जनवरी 2013 में राशन कार्ड को डिजिटल करने की प्रक्रिया भले ही शुरू हो गई थी, लेकिन पिछले चार सालों में ही इसे असली गति मिली है। अब तक करोड़ों की संख्या में फर्जी राशनकार्ड पकड़े जा चुके हैं। उससे पहले ये लोग गरीबों के लिए सब्सिडी वाला राशन आराम से खरीद लेते थे। इन राशन कार्ड को बनवाने में दलाल से लेकर राशन देने वाली दुकानों के कर्मचारी भी शामिल हैं। अगर आप अपने राशन कार्ड का स्टेटस जानना चाहते हैं तो जिस राज्य में रहते हैं वहां के खाद्य आपूिर्त विभाग की वेबसाइट पर जाकर ये जान सकते हैं कि आपका राशन कार्ड चालू है या बंद कर दिया गया है।

खाद्य एवं वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने कहा, ‘हमने सालाना 17,500 करोड़ रुपये की सब्सिडी वाले गेहूं, चावल और मोटे अनाज को देने में हो रही गड़बड़ी को पकड़ा है। हालांकि ये प्रत्यक्ष बचत नहीं है क्योंकि अब इसमें जरूरतमंदों की संख्या बढ़ गई है। अब यह कह सकते हैं कि असली जरूरतमंदों को इसका फायदा हो रहा है।’

सरकारी आंकड़ा देखें तो नैशनल फूड सिक्यॉरिटी ऐक्ट (NFSA) के तहत लोगों को 23.19 करोड़ राशन कार्ड जारी किए गए थे। राशन कार्ड के डिजिटलीकरण और उसे आधार से जोड़ने की प्रक्रिया 82 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। जैसे-जैसे यह काम आगे बढ़ेगा, फर्जी कार्डों को सिस्टम को बाहर कर दिया जाएगा। खाद्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि रद्द किए गए राशन कार्ड में 50 प्रतिशत उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से आते हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश से भी बड़ी संख्या में फर्जी राशन कार्ड रद्द किए गए हैं। एनएफएसए दुनिया की सबसे बड़ी वेल्फेयर स्कीम है, जिसके तहत 80 करोड़ जरुरतमंदों के लिए भोजन सुनिश्चित किया जाता है।

 

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