कांग्रेस कर्नाटक में हर एक कदम फूंक-फूंक कर रखती आई नज़र…..

मोदी और अमित शाह ने पूरी कोशिश करके चुनाव को सांप्रदायिक रंग से सराबोर करने का काम किया. बहरहाल कांग्रेस सूबे में अपनी सरकार को बचाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है वही वो अंध प्रचार से बचने की नीति से चल रही है. सूबे में 12 मई को मतदान किया जाना है.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार अंतिम चरण में पहुंच चूका है और बीजेपी के ताबडतोब प्रचार के बीच कांग्रेस एक अलग ही रणनीति के साथ मैदान में है. कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने दिल्ली का जिक्र करते हुए कहा कि वहां चुनाव के वक्त बीजेपी ने शाही इमाम को इसी रणनीति के तहत आम आदमी पार्टी के साथ जोड़ा था लेकिन केजरीवाल उस वक्त समझदार निकले. इसी तरह बिहार में भी बीजेपी ने ऐसी ही कोशिश की थी.

यहां तक कहा गया कि महागठबंधन जीता तो पटाखे पाकिस्तान में फूटेंगे. लेकिन उस वक्त लालू और नीतीश की जोड़ी ने कांग्रेस के साथ मिलकर बीजेपी को जीतने नहीं दिया. इसी संदर्भ में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजबब्बर का कहना है कि यूपी में अखिलेश-कांग्रेस का गठजोड़ और मायावती अलग-अलग लड़े. इसका फायदा तो बीजेपी को मिला ही. साथ ही बीजेपी ने दिवाली-ईद की बिजली और कब्रिस्तान- श्मशान जैसे भी खूब बयान दिए.

 

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