शादीशुदा महिला से संबंध बनाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने शादीशुदा महिला से संबंध बनाने को लेकर अर्थात व्याभिचार को अपराध बताने वाले क़ानूनी प्रावधान को असंवैधानिक बताया है. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस खनविलकर ने साफ़ किया है कि ‘,हम आईपीसी की धारा 497 और आपराधिक दंड संहिता की धारा 198 को असंवैधनिक क़रार देते हैं.’

एक मामले पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खनविलकर, जस्टिस आरएफ़ नरीमन, जस्टिस इंदू मल्होत्रा और जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने फ़ैसले में कहा कि व्याभिचार से संबंधित भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 497 संविधान के ख़िलाफ़ है. ज्ञात हो कि पहले ऐसे संबंधों पर सिर्फ पुरुषों को ही सजा देने का प्रावधान था.

दरअसल देश से बाहर इटली में रहने वाले एनआरआई जोसेफ़ शाइन ने दिसंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी. उन्होंने अपील थी कि आईपीसी की धारा 497 के तहत बने क़ानून में शादीशुदा महिला से अवैध संबंधों को लेकर पुरुष और महिला दोनों को ही बराबर सज़ा दी जानी चाहिए.

सुनवाई के दौरान जस्टिस नरीमन ने कहा कि ये क़ानून समानता के अधिकार और महिलाओं को एकसमान अधिकारों के प्रावधान का उल्लंघन है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अडल्ट्री तलाक का आधार हो सकता है, लेकिन अपराध नहीं है. इसके साथ ही कोर्ट ने 1860 में बने इस 158 साल पुराने क़ानून को रद्द कर दिया है.

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