चार बहनों ने पिता को दी मुखाग्नि, पंचायत ने कर दिया बहिष्कार

राजस्थान के बूंदीे जिले में खाप पंचायत ने तुगलकी फरमान सुनाया है। एक परिवार को ​समाज से इसलिए बहिष्कार कर दिया कि चार बहनों ने अपने पिता की इच्छा के मुताबिक उनकी अर्थी को कंधा दिया और उनका अंतिम संस्कार किया। पंचायत ने उन्हे अंतिम संस्कार करने से भी रोका इसके बावजूद बेटियों ने अपने पिता की इच्छा को पूरा किया।

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छह साल से पेरेलाइिसस से जूझ रहे बाहरली बूंदी के रेगर मोहल्ला के दुर्गाशंकर की शनिवार रात मौत हो गई। उनके कोई पुत्र नहीं था तो इसलिए वह चाहते थे कि चारों बेटियां ही उनका अंतिम संस्कार करें। चार बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा दिया और रोटरी मुक्तिधाम पहुंच कर विधिविधान से पिता को मुखाग्नि दी। जिसका समुदाय के पंचों ने विरोध किया और उन्हें समाज से बहिष्कृत करने की धमकी दी।
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पंचायत ने समाज के किसी भी सदस्य को अंतिम संस्कार में शामिल ना होने के लिए कहा। इसके बावजूद बेटियों ने पंचों की चेतावनी को दरकिनार कर अर्थी को कांधा दिया। इसके बाद परिवार और उनके रिश्तेदारों को समुदाय परिसर में अंतिम संस्कार के बाद नहाने और खाने को नहीं दिया गया। बड़ी बेटी मीना ने बताया कि पंचायत ने हमें पिता के अंतिम संस्कार की रस्मों में शामिल न होने के लिए कहा गया जिसे हमने मानने से इनकार कर दिया। पिता के दाह संस्कार के बाद पंचायत ने मां से माफी मांगने के लिए कहा। चूंकि हमने कोई गलती नहीं की थी इसलिए हमने मांफी मांगने से भी इनकार कर दिया।
PunjabKesari दूसरी बेटी कलावती ने बताया कि यह हमारे पिता की आखिरी इच्छा थी कि उनकी चार बेटियां उनकी अर्थी को कंधा दें और अंतिम संस्कार करें क्योंकि हमारा कोई भाई नहीं है। हमने कोई गुनाह नहीं किया है। वहीं जब समुदाय के प्रमुख चंदूलाल चंदेलिया ने परिवार को समाज से बहिष्कृत करने की बात को सिरे से खारिज कर दिया। बूंदी नगर निगम के पूर्व अध्यक्ष मोजू लाल ने भी पंचों द्वारा परिवार का बहिष्कार करने की बात नकार दी।

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